मुरादगंज में सेंट्रल बैंक के बाहर कैश के इंतजार में बैठीं महिलाएं।
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नोटबंदी के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों में कैश की किल्लत बनी हुई है। करेंसी चेस्ट से ग्रामीण क्षेत्रों की बैंकों को नगदी न मिलने से ग्राहक परेशान हैं। गांव के लोग पूरे दिन बैंक में कैश मिलने का इंतजार करते हैं। बाद में इन्हें मायूस लौटना पड़ता है।
मुरादगंज कस्बे की सेंट्रल बैंक में एक सप्ताह से कैश का संकट है। गुरुवार को आसपास के ग्रामीण कैश के इंतजार में बैंक पहुंचे। यहां डिमांड के हिसाब से कैश नहीं था। बैंक में कैश के इंतजार में बैठीं पुर्वा डौरी की सुलेखा का कहना है कि ससुर की मौत हो गई है। अंतिम संस्कार व तेरहवीं के लिए रुपयों की जरूरत है। भुगतान नहीं मिल रहा है। एक सप्ताह से सारे काम छोड़कर बैंक के चक्कर लगा रही हैं।
वहीं भौतापुर निवासी रानी देवी का कहना है कि एक सप्ताह से बैंक आ रही हैं। कैश नहीं मिल रहा है। सेगनपुर के खाताधारक तस्लीम खान ने आरोप लगाया कि बैंक कर्मचारी चहेतों को ही रुपये देते हैं। बाकी लोगों को कैश न होने की बात कहकर बैरंग कर देते हैं। कैश की किल्लत से ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से कैश भिजवाने की मांग की है