बिधूना। बिधूना व एरवाकटरा क्षेत्र में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए आरआरसी सेंटर बदहाली का शिकार हैं। इन सेंटरों का संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। कई सेंटरों पर झाड़ियां और खरपतवार उग आए हैं, जिससे भवन जर्जर होने लगे हैं। बुधवार को हुई पड़ताल में यह खुलासा हुआ।
एरवाकटरा के रठगांव में तीन वर्ष पहले गांव से एक किमी दूर आरआरसी सेंटर का निर्माण कराया गया था। इसका संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। सेंटर के चारों तरफ झाड़ियां व खरपतवार उग आए हैं। भवन भी देखरेख के अभाव में जर्जर होने लगा है। यहां पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता है, जो बारिश में कीचड़ से भर जाता है।
बिधूना के सराय प्रथम और अछल्दा मार्ग किनारे बने सेंटर भी घास व झाड़ियों से घिरे हैं। पड़ताल के दौरान ताजपुर, मुड़ियाई, मऊ कछपुरा, रूपपुर सहार, धनवाली पसुआ, कुसमरा, बेलपुर बेला व बंथरा समेत कई पंचायतों में आरआरसी सेंटर बंद मिले। गांवों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग रहे हैं।
कूड़ा प्रबंधन की अधूरी योजना
इन सेंटरों पर गीला व सूखा कूड़ा एकत्र कर उसकी छंटाई की जानी थी। प्लास्टिक, कांच व अन्य उपयोगी सामग्री को अलग करने की योजना थी। जैविक कचरे से कंपोजिट खाद बनाने के लिए गड्ढे भी बनाए जाने थे। इस योजना से गांवों में गंदगी कम होने और कूड़े का बेहतर प्रबंधन होना था लेकिन कूड़ा निस्तारण का काम शुरू नहीं हुआ, भवनों पर घास व झाड़ियां कब्जा जमा चुकी हैं।
बैठकों में उठते हैं मुद्दे, हालात जस के तस
ग्राम पंचायतों में प्रत्येक सप्ताह होने वाली बैठकों में स्वच्छता व विकास से जुड़े मुद्दे उठाए जाते हैं। इसके बावजूद आरआरसी सेंटरों की स्थिति में सुधार नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सेंटरों को नियमित रूप से संचालित कराया जाए तो गांवों में जगह-जगह जमा होने वाले कूड़े से काफी हद तक निजात मिल सकती है। वहीं कूड़ा एकत्र कर जैविक कचरे से खाद तैयार करने व उपयोगी सामग्री को अलग करने की व्यवस्था भी प्रभावी हो सकती है।
वर्जन -
आरआरसी सेंटरों की साफ-सफाई कराकर उन्हें जल्द चालू कराया जाएगा। सभी सचिवों को निर्देशित किया है कि किसी भी आरआरसी सेंटर के परिसर में घास, झाड़ियां या अन्य गंदगी नहीं मिलनी चाहिए।
संजीव कुमार पांडेय, बीडीओ बिधूना व एरवाकटरा
फोटो -01- सराय प्रथम में झाड़ियों से घिरा रठगांव का आरआरसी सेंटर। संवाद