गंदगी और जलभराव की पहचान बनी शहर की कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर के दिन फिरने वाले हैं। मंडी परिसर की सड़कों को चमाचम बनाने और जलभराव की स्थाई समस्या के निदान के लिए मंडी अधिकारियों ने सात करोड़ के प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जाने की कवायद शुरू कर दी है।
मंडल की सबसे बड़ी गल्ला मंडी और कृषि मंडी समिति परिसर की खस्ताहाल सड़कों और जलभराव की समस्या जूझ रहे व्यापारियों को सहूलियत देने के लिए मंडी अधिकारियों ने खाका तैयार कर लिया है।
इसके तहत पूरे मंडी परिसर की तकरीबन 12 सड़कों के निर्माण के साथ ही जल निकासी हेतु ड्रेनेज सिस्टम को विकसित करने के लिए मंडी के अधिकारी उठ खड़े हुए हैं।
इस बाबत मंडी अधिकारियों की ओर से सात करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाया गया है। उक्त धनराशि से मंडी अधिकारियों ने सड़कों के निर्माण के साथ ही नाला-नाली निर्माण कराया जाना स्वीकृत किया है।
साथ ही मंडी परिसर में जल भराव की समस्या के स्थाई समाधान के लिए मंडी परिसर में ही ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण कराए जाना भी तय किया है।
सड़क और ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण कराने के लिए मंडी सचिव देवकुमार पोरवाल की ओर से प्रस्ताव बना लिया है। उक्त निर्माण योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए मंडी समिति प्रस्ताव को मुख्यालय भेजे जाने की तैयारी कर रही है।
मंडी परिसर को हाईटेक बनाने के लिए डीडी मंडी के निर्देश पर भेजे गए 56 करोड़ के प्रस्ताव को आज भी स्वीकृति का इंतजार है। उक्त प्रस्ताव की स्वीकृति के संबंध में मंडी अधिकारी भी अब जबाव देने से कतराने लगे हैं।
मंडी परिषद में खस्ता हाल सड़कों व जल भराव की समस्या को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्थानीय स्तर पर प्रस्ताव को फाइनल कर दिया गया है। तैयार प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जा रहा है।- देव कुमार पोरवाल, मंडी सचिव