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यमुना जल को आचमन लायक बनाने की कवायद

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औरैया। यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। नालों का गंदा पानी यमुना में जाने से रोकने के लिए दो एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के लिए शासन को रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है। एसटीपी के जरिये साफ हुए पानी को सिंचाई में प्रयोग किया जाएगा।
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शेरगढ़ घाट के आसपास तीन नाले यमुना नदी में गिर रहे हैं। इसमें एक नाले से शहर भर का गंदा पानी यमुना में जा रहा है तो दूसरे नाले से खानपुर का पानी जा रहा है। इसी तरह तीसरे नाले से मढ़ापुर का पानी यमुना को गंदा कर रहा है। प्रदूषित हो रही यमुना नदी का जल आचमन लायक न रहने के मुद्दे को अमर उजाला ने 23 दिसंबर के अंक में उठाया था।
इसके बाद एसटीपी लगाने के लिए रिवाइज इस्टीमेट बनाने की कवायद शुरू हुई है। एसटीपी से यमुना में गिरने वाले पानी को साफ किया जाएगा। दो एसटीपी बनाने पर विचार चल रहा है। दयालपुर व खानपुर के पानी को एक एसटीपी से साफ किया जाएगा। जालौन रोड के नाले से गिरने वाले शहर भर के गंदे पानी को साफ करने के लिए दूसरा एसटीपी लगाया जाएगा। इससे यमुना का पानी स्वच्छ होगा।
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जलनिगम के जेई विवेक कुमार ने बताया कि एसटीपी के लिए मार्च 2020 में इस्टीमेट भेजा गया था। 80 करोड़ से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगना था। अब रिवाइज इस्टीमेट भेजा है। एक से डेढ़ महीने में रिवाइज इस्टीमेट पर जवाब आने के बाद इस पर कार्य शुरू हो जाएगा।
एक साल में नाले की चौड़ाई हो गई तीन गुना
एक साल में यमुना में गिरने वाले नाले की चौड़ाई तीन गुना हो गई है। पहले ये लगभग चार फीट के आसपास चौड़ा था अब ये 12 से 15 फीट चौड़ा हो गया है। इसी नाले से शहर भर की गंदगी यमुना में गिरती है।
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