नीलांबुज श्यामलं कोमलांगम, सीता समारोह वाम भागम्, पाणौ महा सायक चारू चापं, नमामि रामम् रघुवंश नाथम्। यह श्लोक पूरे मानस का सार तत्व है। जिस प्राणी ने इस श्लोक को अपने जीवन में उतार लिया, वह भवसागर पार हो गया। इस श्लोक में प्रभु राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक का सार छुपा हुआ है।
इस श्लोक में श्रीरामचन्द्र जी ने स्वयं को वनवासी माना ही नहीं है। उन्होंने तो मानव कल्याण के लिये नर लीला करते हुए मानव का उद्धार किया है । जब- जब प्रभु ने पृथ्वी पर अवतार लेकर नर लीला की है, तब - तब भगवान शिव, शेष आदि भी विभिन्न रूपों में अवतरित होकर प्रभु की सेवा करने आए हैं।
ग्राम मुड़ैना रामदत्त जुआ पुल के पास आयोजित 10 दिवसीय श्री रामकथा ज्ञान यज्ञ एवं पंचकुंडीय श्री सीताराम महायज्ञ में कथा व्यास स्वामी रामभद्राचार्य जी के प्रवचन सुनने को भारी भीड़ उमड़ रही है।
आज की कथा में कथा व्यास स्वामी रामभद्राचार्य जी बताया कि हनुमान की सेवा, आराधना करने से बल, बुद्धि, विद्या और पौरुष की प्राप्ति होती है। कहा कि जिस घर में तुलसी की पूजा, गाय की सेवा, अतिथि का सत्कार और परोपकार करने के साथ ही हरि स्मरण, हरि संकीर्तन किया जाता है, उस घर में कभी दरिद्रता नहीं होती है।
सारी रिद्धियां-सिद्धियां स्वत: ही विराजमान रहती हैं, क्योकि ऐसे सद्कर्म करने वाले मनुष्य के घर हरिहर सदा विराजमान रहते हैं। कहा कि जहां हरिहर विराजमान हों वहां सारी सुख संपदाएं, वैभव स्वत: ही प्रभु की सेवा में लगे रहते हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक कौशल किशोर त्रिपाठी, अनिल त्रिपाठी, सुशील त्रिपाठी, मनीष त्रिपाठी, रजनीकांत शुक्ला, प्रणव दुबे के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।