राजस्थान के राजीव सागर, इंदिरा सागर और कोटा बैराज बांधों से छोड़े गए पानी ने चंबल के रास्ते यमुना में पहुंच गया है। यह पानी अब जिले के किसानों की बर्बादी का कारण बना है। जिले के सैकड़ों किसानों की फसल जलमग्न हो गई है। ओलावृष्टि के तबाह हुए किसानों पर बाढ़ ने दोहरा जख्म दिया है।
चंबल के रास्ते यमुना में पहुंचा बैराज का पानी अब नदी के किनारे स्थित क्योंटरा, सरसई, अस्ता, मई, भदौरा, जुहीखा, गूंज, कैथौली, बीजलपुर, मिश्रपुर मानिकचंद्र, फरिहा, बड़ेरा, गोहानी कलां, गोहानी खुर्द, वंशियापुर, जाजपुर, भरेपुर कलां, बरदौली, असेवा व मढ़ापुर आदि गांवों में पहुंच गया है।
इन गांवों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूबकर नष्ट हो रही है। गांवों के बाहर कृषि भूमि पर खड़े, बाजरा, मूंग, उर्द, अरहर, ज्वार, जुंडी आदि फसलों पर करीब दो से तीन फीट पानी चढ़ गया है।
बाढग़्रस्त गांवों के राम नारायन, सुरेश चंद्र, राम बहादुर, नरेश सिंह, बेंचेलाल, अशर्फीलाल, राजकिशोर, रामनारायन, लाखन सिंह आदि किसान कभी पानी में डूबी अपनी फसल की ओर निहार रहे तो कभी प्रशासन की ओर राहत भरी नजरों से देख रहे हैं। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से बाढ़ से नष्ट हो रही फसलों की भरपाई की मांग की है।
कालिंदी का काल क्योंटरा गांव वालों के चेहरों पर दिखने लगा है। रात दिन खेतों के चक्कर काट रहे किसानों का दर्द सुनने और देखने वाला कोई नहीं है।
सूखे का दंश झेल रहे इन किसानों को अभी क्षतिपूर्ति का मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में बाढ़ की विभीषिका ने इन्हें बर्बादी की राह पर लाकर छोड़ दिया है। पेश है क्योटरा क्षेत्र से बाढ़ की एक रिपोर्ट।
छोटे मिश्रा से पूछो बाढ़ का दर्द- औरैया। बाढ़ का दर्द इस गांव में किसी ने झेला है तो वह है छोटे मिश्रा। पिछले साल आई बाढ़ से पानी गांव तक चढ़ गया था। सभी खेत जलमग्न हो गए थे ।
दोपहर में छोटे मिश्रा परिवार को सुरक्षित करने में लगे हुए थे। उसी दौरान उनका पुत्र कन्हैया (11 वर्ष) बाढ़ की चपेट में आ गया। दीवार से उसके हाथ की पकड़ छूट गई और वह नदी के बहाव के साथ यमुना में हमेशा को समां गया। आंखों से सामने बेटे को यमुना में समाता देख पिता का कलेजा फट गया।
हम तो डूब गए- हिस्से की पांच में से तीन बीघा फसल बाढ़ से डूब गई है। बाढ़ ने खेती तो डुबाई ही, हमें भी कर्ज में डुबो दिया है। होम सिंह
उम्मीद भी बही- कुल एक एकड़ भूमि पर दो हजार रुपये जुताई, खाद, बीज व डीएपी और सिंचाई पर खर्च कर अच्छी फसल की उम्मीद लगाई थी। यमुना की बाढ़ में फसल के साथ उम्मीद भी नष्ट हो गई है। संतोष कुमार
मेहनत के साथ गंवाए 2500 रुपये - ढाई बीघा खेत में बाजरा बोआ था। पांच-पांच इंच की फसल भी लहलहाने लगी थी। सब डूबी हुई है। श्याम सिंह
अब क्या करें हम- 15 दिन पहले पांच बीघा खेत में तिली की फसल बोई थी। खेतों में किल्ला भी फूटने लगे थे। बाढ़ के पानी ने फसल तबाह कर दी है। अब हम क्या करें। कैलाश नारायण
यमुना में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है। जिले में किसानों की फसलें डूबी हुई हैं। उनका आंकलन कराया जाएगा। राजेंद्र कुमार, एसडीएम, अजीतमल