औरैया। ऑटो व ई-रिक्शा में सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर ऑटो व ई-रिक्शा में क्यूआर कोड लगाए जाने थे। इसे स्कैन करने पर वाहन चालक व मालिक की पूरी डिटेल सामने होती।
स्थिति यह है कि ऑटो में लगे अधिकांश क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो रहे हैं। वहीं कई में अभी तक कोड लगे ही नहीं हैं। एक सितंबर से बिना क्यूआर कोड लगे वाहन सड़क पर न दिखने का आदेश था, पर इसके लिए चलाया गए अभियान में खानापूर्ति भर कर ली गई।
कुछ माह पूर्व लखनऊ में एक ऑटो में युवती के साथ दुष्कर्म की वारदात सामने आई थी। इस पर गंभीरता दिखाते हुए शासन ने ऑटो व ई-रिक्शा के शीशे पर क्यूआर कोड लगाने के निर्देश दिए थे। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वाहन चालक व मालिक का नाम, मोबाइल नंबर व पूरी डिटेल आ जाती है। इसमें वाहन चालक का संबंधित थाने से जारी चरित्र प्रमाण पत्र भी अपलोड रहता है, ताकि पता किया जा सके कि वाहन चालक अपराधी तो नहीं है।
एक सितंबर से बिना क्यूआर कोड के वाहन सड़क पर न दिखने का निर्देश दिया गया था। आदेश आते ही परिवहन विभाग व यातायात पुलिस ने अभियान चलाकर वाहनों पर क्यूआर कोड लगवाने का काम शुरू किया। जिले में 16000 से अधिक ऑटो व ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। इनमें से अभी तक 4500 वाहनों में ही अब तक ये कोड लगवाया जा सका। कुछ समय बाद अभियान बंद हो गया।
हालात यह हैं कि डेडलाइन बीतने के साढ़े तीन महीने बाद बिना क्यूआर कोड लगे वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं। जिस वाहन में क्यूआर कोड लगा भी है, वह धुंधला हो चुका है। स्कैन ही नहीं होता। यातायात विभाग अब फिर से अभियान चलाने की बात कह रहा है।
यह मामला समीक्षा बैठक में रखा जाएगा। यह लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। अभियान चलाकर ऑटो, ई-रिक्शा में क्यूआर कोड लगवाए जाएंगे। जल्द ही इसकी दोबारा शुरूआत होगी।
- मनोज गंगवार, सीओ ट्रैफिक
फोटो-20-धुंधला पड़ा ऑटो के शीशे पर क्यूआर कोड। संवाद