औरैया। सराफा कारोबारी कमलकांत वर्मा का नाम असलहा और कारतूसों की तस्करी से जुड़ने के बाद प्रशासन भी सतर्क है। प्रशासन अपने स्तर से कारोबारी व उसके परिवार के नाम जारी शस्त्र लाइसेंसों की जांच कर रहा है।
इसके लिए इटावा से भी संपर्क किया गया है। वर्ष 1997 से पहले की पत्रावलियां इटावा से औरैया नहीं भेजी गईं थीं। एनआईए जांच के बाद डीएम इंद्रमणि त्रिपाठी ने एडीएम न्यायिक नीरज प्रसाद को जांच के आदेश दिए थे। बीते एक सप्ताह से वह असलहों के अभिलेख तलाश रहे हैं।
इसमें यहां केवल रजिस्टर ही उनके हाथ लगे हैं। इसके अलावा आवेदन और स्वीकृति पत्रावलियाें का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। इसके चलते इटावा प्रशासन से भी संपर्क किया जा रहा है, लेकिन उनके द्वारा लगातार समय मांगा जा रहा है।
दरअसल, वर्ष 1997 से पहले इटावा ही जिला था, औरैया जिले के गठन के बाद केवल रजिस्टर ही यहां आए थे। ऐसे में पत्रावलियां कहां हैं, इसका कोई पता नहीं है। दूसरी तरफ अब तक कमलकांत के भाइयों समेत तीन से एनआईए पूछताछ भी कर चुकी है। पूछताछ के बाद वह लौट आए हैं, लेकिन अब तक लोगों से उन्होंने दूरी बना रखी है। सूत्रों के अनुसार करीबियों से भी वह मिलने से बच रहे हैं।
मामले में शहर स्थित जिला अस्पताल के पास रहने वाले कमलकांत वर्मा, उनके परिजन और करीबी के घरों पर पटना एनआईए टीम ने चार दिसंबर को छापा मार कार्रवाई की थी। करीब 15 घंटे तक 13 टीमों ने अलग-अलग जगहों से अभिलेख और असलहे खंगाले थे।
पूछताछ में करीबी खोल सकते हैं राज
कमलकांत वर्मा के कई करीबियों को एनआईए एक-एक कर अलग-अलग तारीखों पर पूछताछ के लिए पटना बुला रही है। इस पूछताछ में कमलकांत का कोई राज खुल सकता है। हालांकि, पहले से ही एनआईए ने स्थानीय पुलिस ने बुलाए गए लोगों का पूरा इतिहास मंगा लिया है। बुलाए गए कुछ लोगों का आपराधिक इतिहास भी रहा है। ऐसे में एनआईए को उन पर भी कमलकांत के सहयोग करने का शक है।