फोटो-19एयूआरपी18- सहार के पुर्वा रावत में स्थित कबाड़ की दुकान। संवाद
सहार। बांग्लादेशी के पकड़ने जाने के बाद थाना पुलिस खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जून में गो सेवक की ओर से सीएम पोर्टल में की गई शिकायत को पुलिस में गलत ठहरा दिया गया। थानाध्यक्ष बदलते ही ठीक चार माह बाद पुलिस ने एक बांग्लादेशी को पकड़कर जेल भेज दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रधान ने गलत तरीके से आधार कार्ड बनवाकर 32 लोगों को वोट बैंक के लालच में शरण दी। यह लोग आठ-10 सालों से गांव में रह रहे हैं।
सहार के पुरवा रावत निवासी विवेकानंद श्रीकृष्ण गोशाला के महामंत्री अश्वनी कुमार पांडेय ने बताया कि जून माह में तत्कालीन थानाध्यक्ष को तीन बार थाने से करीब पांच सौ मीटर दूर 32 बांग्लादेशी होने का दावा किया गया था। पर, पुलिस ने ध्यान नहीं दिया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की। गो सेवक का आरोप है कि प्रधान ने अपने मकान में निवास दर्शाकर उनके आधार कार्ड बना दिए। इन सभी को शरण देने के पीछे वोट का लालच बताया गया।
यहां तक की 32 में तीन लोगों को आवास योजना का लाभ भी दिया गया जबकि इनके पास कोई भवन व जमीन नहीं है। 32 लोगों में कुछ ऐसे हैं कि जिनका वोटर कार्ड पर प्रधान के मकान प्रदर्शित हैं। इस शिकायत के बाद जून में ही थाना पुलिस ने जांच की। इसमें उन्होंने उनके लंबे समय से रहने बताया और जांच का निस्तारण कर दिया गया। इधर, चार माह बाद सितंबर को थानाध्यक्ष बदले, दोबारा शिकायत हुई तो कबाड़ की दुकान में रह रहे बांग्लादेश जनपद खुलना तहसील फुलथला के गांव दामोदर निवासी इस्लाम को पकड़ कर जेल भेज दिया। इस आरोपी को पुलिस ने जहां से पकड़ा है। गो सेवक ने उसी स्थान के पास रहने वालों पर बांग्लादेशी होने की आशंका जताई थी, जो अब पुलिस की जांच पर सवाल उठा रहा हैै।
महिला की जाति प्रमाणपत्र पर उठ रहे सवाल
गो सेवक का दावा है कि जिस महिला को आवास योजना का लाभ दिया गया। उसका जाति प्रमाण गांव से बनने पर सवाल उठाए हैं। गो सेवक का आरोप है कि महिला का जाति प्रमाणपत्र मायके से बनता है। प्रधान पर फर्जी रिपोर्ट लगाने का आरोप है। अगर महिला के मायके का पता लगाया जाए तो तस्वीर साफ हो सकती है।
गंभीरता से हो रही जांच
बांग्लादेशी मामले में पुलिस गहनता से जांच कर रही है। अगर जांच के दौरान कोई भी सामने आया तो कार्रवाई की जाएगी।
-आलोक कुमार मिश्रा, एएसपी