औरैया। चिरूहुली-मिहौली के बीच हाईवे पर 16 मई को हुए हादसे में मृत 25 श्रमिकों के शव भेजने को लगाए गए पांच लेखपालों के निलंबन के विरोध में लेखपाल लामबंद हो गए हैं। लेखपाल संघ ने एसडीएम सदर को मंगलवार को ज्ञापन सौंपकर ड्यूटी में उत्पन्न व्यवधान के पीछे तहसीलदार सदर की लापरवाही बताई। संघ ने निलंबन वापस न लेने पर बड़ा निर्णय लेने की चेतावनी दी है।
16 मई को हादसे में 25 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी। इन मजदूरों के शवों को घर तक पहुंचाने के लिए वाहनों के साथ लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई थी। पांच लेखपालों के ड्यूटी पर न पहुंचने पर एसडीएम सदर विजेता ने पांचों को निलंबित कर दिया था। मंगलवार को लेखपाल संघ ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पांचों लेखपालों के निलंबन को गलत ठहराते हुए निलंबन वापस लेने के लिए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि तहसीलदार ने 16 मई की शाम 6 बजे उन्हें बताया कि प्रवासी श्रमिकों के शवों को घर तक पहुंचाने के लिए साथ जाना है। इस पर लेखपाल राकी, अंकित अग्रवाल, शशिकांत पोरवाल, ललित प्रताप सिंह शाम 7:30 बजे जानकी वाटिका पहुंच गए। वह रात 11:30 बजे तक तहसीलदार सदर के साथ रहे। तहसीलदार ने उन लोगों को ड्यूटी लगने के बाद बुलाने की बात कहकर घर भेज दिया।
आरोपित लेखपालों ने बताया कि रात 2:26 बजे व्हाट्ऐप पर सूची डाली गई। जिसे उन लोगों ने सुबह देखा। सभी लेखपाल जानकी वाटिका पहुंचे लेकिन शवों की गाड़ियां जा चुकीं थीं। इसके बाद शव ले जाने वाली गाड़ियों में मौजूद कांस्टेबलों को फोन किया तो पता चला कि गाड़ियां फतेहपुर पहुंच चुकी हैं।