कस्बा निवासी युवा कृषि वैज्ञानिक जल्द ही किसानों की लौकी उत्पादन बढ़ाने का तोहफा देंगे। रामकरेला प्रजाति की लौकी की एक पौध से कम से कम 700 फल प्राप्त होंगे। एक कार्यक्रम के सिलसिले में अपने घर आए युवा वैज्ञानिक ने अपने नए शोध के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि वह टमाटर, चेरी टमाटर की पैदावार में लगे हुए हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान, मुक्तेश्वर नैनीताल में कार्यरत प्रमुख वैज्ञानिक डा. राजनारायण रामकरेला प्रजाति पर शोध कर रहे हैं। डा. राजनारायण ने बताया कि रामकरेला प्रजाति की लौकी की एक पौधे से करीब 700 फल मिल जाते हैं।
उन्होंने बताया कि नैनीताल के मुक्तेश्वर में प्रगतिशील किसान अनिल सेन ने अपनी गृहवाटिका में एक पौधे से लगभग 900 फल प्राप्त किए हैं। एक फल का भार औसतन 300 ग्राम होता है। सितंबर-अक्तूबर माह में इसके फल मिलते हैं। थोक बाजार में रामकरेला का भाव 30 से 40 रुपये तक है।
जबकि महानगरों में 50 से 60 रुपये प्रति किलो के दाम में बिकता है। रामकरेला प्रजाति के पौधों की ज्यादा देखभाल भी नहीं करनी पड़ती है। कीटों का असर कम होता है। इसे बेमौसमी सब्जी के रूप में बेचकर देश के किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि वह शिमला मिर्च और चेरी टमाटर के विभिन्न रंगों और आकार की प्रजातियां भी विकसित करने में लगे हैं।
डा. राजनारायण अपने शोध को डा. नारायण पोली हाउस तकनीकी का भी प्रयोग कर रहे हैं। डा. राजनारायण की इस उपलब्धि पर पर्यावरण विद् भागवत स्वरूप विश्नोई, जनता इंटर कालेज प्रधानाचार्य कृष्ण मोहन उपाध्याय, जनता महाविद्यालय के उपप्राचार्य डा. उमेश दीक्षित, प्रोफसर अरविंद दुबे आदि ने उन्हें बधाई दी है।