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Auraiya News: प्रियंका के इकलौते पुत्र के भविष्य के लिए बुआ चिंतित

Sat, 12 Jul 2025 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फफूंद। वर्ष 2024 के जून माह में सेंगुर नदी में तीन बच्चों को डुबोकर मारने वाली प्रियंका का इकलौता पुत्र सोनू बुआ के पास है। दादी और चाचा की आर्थिक आर्थिक हालत कमजोर है। ऐसे में परिजन उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इतनी बड़ी घटना के एक साल बीतने के बाद भी शासन से मासूम के पालन-पोषण को कोई मदद नहीं मिली। इससे दादी, चाचा और बुआ परेशान हैं। उन्होंने सीएम व डीएम से बच्चे के पालन-पोषण के लिए सरकारी मदद की मांग की है।
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फफूंद थाना क्षेत्र के बरौआ गांव निवासी प्रमोद सविता ने अपनी पुत्री प्रियंका की शादी इटावा जनपद के बसरेहर थाना के गांव लुहिया निवासी अवनीश के साथ की थी। शादी के आठ साल में प्रियंका चार बेटों की मां भी बन गई। इसी बीच पति की करंट से मौत के बाद प्रियंका ससुराल में कुछ दिन ही रुकी। उसका अपने चचिया ससुर के पुत्र आशीष उर्फ डैनी से प्रेम प्रसंग चलने लगा। वह उसके साथ बच्चों समेत औरैया आकर रहने लगी।
27जून 2024 की सुबह वह अपने चारों बच्चों से ननिहाल चलने को कहकर केशमपुर गांव के पास सेंगुर नदी के पुल के नीचे ले गई। और पानी में डुबोकर तीन बच्चों मंगल,माधव और आदित्य को मार डाला जबकि उसका बड़ा पुत्र सोनू किसी तरह बच निकला जिसे बुआ अपने साथ ले गई।
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गुरुवार को अदालत ने प्रियंका को फांसी की सजा सुनाई। जानकारी पर उसके मायके गांव बरौआ में सन्नाटा छा गया। पिता और चाची बेहाल हो उठे। वहीं, प्रियंका के इकलौते पुत्र सोनू की परवरिश को भी उसकी दादी व बुआ के घर के लोग परेशान हैं। उनकी आर्थिक हालत खराब है।
घर के नाम पर एक खंडहर मकान है। जहां पन्नी लगाकर उसकी परदादी 90 वर्षीय सोमवती, दादी राधा और चाचा मनीष के साथ सोनू रह रहा था। खेती के नाम पर कुछ भी नहीं है। पैसे की किल्लत और पेट भरने की चिंता के कारण सोनू की दादी और चाचा औरैया आकर मेहनत मजदूरी कर रहे हैं। वह एक किराये के कमरे में रहते हैं जबकि बारिश में मकान में दिक्कत होने से परदादी सोमवती पड़ोस के एक घर के बरामदे में शरण लिए हुए हैं। सोनू के भविष्य की जिम्मेदारी उसकी इटावा में रहने वाली बुआ ज्योति उठा रहीं हैं।

ज्योति ने बताया कि उनकी भी स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं है। अपने तीन पुत्रों पवन, अंश और अमन के साथ वह सोनू का भी ख्याल रख पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दे रही हैं। बताया कि घटना के बाद औरैया प्रशासन ने चार भाइयों में इकलौते बचे सोनू की परवरिश और बालिग होने तक उसके खर्च के लिए सरकार से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन भी दिया था।
वह और उनका भाई मृत भतीजों के शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव लुहिया ले गए थे। उस समय भी प्रशासन ने कोई सहायता नहीं की थी। पैसे न होने पर गांव के लोगों की मदद से वह लोग किराए पर निजी वाहन करके शव को गांव ले गए थे। बताया कि एक वर्ष बीत गया है लेकिन प्रशासन ने सोनू के पालन-पोषण के लिए कोई पहल नहीं की।
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