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वाहनों के लिए भटके, न मिलने पर पैदल ही घरों को हुए रवाना

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फोटो 19 एयूआरपी 04- कंचौसी रेलवे क्रासिंग पर लगी राहगीरों की भीड़ - फोटो : AURAIYA
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औरैया। इटावा-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चिरुहुली और मिहौली के समीप हादसे में 28 मजदूरों की मौत से भी प्रशासन ने सीख नहीं ली है। मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारी पहले जैसे ढर्रे पर दिखे, पुलिस कर्मी भी पैदल जाने और प्रतिबंधित वाहनों से ढोए जा रहे श्रमिकों के प्रति सजग नहीं दिखे। लॉकडाउन के बाद से यह देश की सबसे बड़ी घटना है, इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री तक ट्वीट कर चुके हैं।
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मंगलवार सुबह जालौन चौराहे के निकट कई प्रतिबंधित वाहनों से मजदूर कानपुर और झांसी की ओर जाते दिखे। कई वाहन से मजदूर झांसी से इटावा की ओर भी आते-जाते नजर आए। चौराहे पर मौजूद सिपाहियों ने उन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाई और न ही उनसे किसी तरह की पूछताछ की। जब कुछ मजदूरों ने जालौन चौराहे पर मौजूद पुलिस कर्मियों से वाहन रोकने का आग्रह किया तो पुलिस कर्मियों ने उन्हें आगे जाकर वाहन रोककर बैठने की बात कहते हुए भगा दिया। यह सिलसिला पूरे दिन चला।
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