फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आवक बढने से आलू के दाम गिरे, किसान परेशान

विज्ञापन
फोटो 19एयूआरपी14- बाजार में लगी आलू की दुकान - फोटो : AURAIYA
विज्ञापन
बेला (औरैया)। बेला क्षेत्र की नजदीकी अंतर्जनपदीय तिर्वा मंडी में आलू की आवक बढने के साथ ही भाव में गिरावट जारी है। चार दिन में 800 रुपये क्विंटल भाव गिरने से किसान का दर्द उभरने लगा है। एक ओर गेहूं की बुआई के लिए खेत खाली करना मजबूरी है, वहीं 500 से 650 रुपये पैकेट आलू की थोक बिक्री से लागत निकालने में किसानों के लाले पड़े हैं। ऐसे में किसान परेशान हैं।
विज्ञापन

खेतों में आलू की फसल तैयार है। गेहूं की बुवाई भी अब दिनों दिन लेट हो रही है। ऐसे में किसान आलू खोदकर गेहू बुवाई के लिए खेत खाली करने में जुटा है। इसके चलते थोक मंडी व बाजारों में आलू की आवक बढ़ गई है। आवक बढने से आलू का भाव भी लगातार गिरता जा रहा है। शनिवार को तिर्वा मंडी में करीब 200 ट्रक आलू पहुंचा। बिक्री शुरू हुई तो 500 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) से लेकर 650 रुपये तक बिका। महंगा बीज बोकर सस्ता आलू बिकने से किसानों के चेहरों पर मायूसी दिखी। किसानों का कहना है कि अब तो आलू में लागत निकलना भी मुश्किल है। कच्ची फसल खेत में रोकी भी नहीं जा सकती, इससे मंडी में बेचना मजबूरी है।
किसानों ने बयां किया दर्द
बेला निवासी किसान जीतू ने बताया कि बाजार में ट्रैक्टर से 22 पैकेट आलू बेचने लाया था। यह 650 रुपये पैकेट बिका। इसमें तो लागत भी नहीं निकल रही है। गांव याकूबपुर निवासी अजय कुमार ने बताया कि 25 पैकेट आलू में 600 रुपये में बेचा। एक बीघा आलू की फसल में करीब 13 हजार रुपये से अधिक की लागत आई। 20-25 पैकेट प्रति बीघा आलू की पैदावार हुई। इसमें करीब दो हजार रुपये बीघा की लागत में भी घाटा है। याकूबपुर निवासी नन्हें ने बताया कि 40 पैकेट आलू 631 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से बिका। इसमें लागत तो निकल आई, लेकिन खुद की मेहनत और भाड़ा घाटे में गया। ग्राम ढिपारा निवासी लाखन सिंह बताते हैं कि आलू के भाव न मंडी में न ही बाजारों में अच्छे मिल रहे हैं जिससे उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें