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औरैया: सचिवालय में नौकरी दिलवाने के नाम पर ठगने वाले रेलकर्मी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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औरैया। लखनऊ सचिवालय में बेटे की नौकरी लगवाने का झांसा देकर कानपुर जीएमसी में कार्यरत टेक्नीशियन से 10.50 लाख रुपये ठगने वाले साथी रेलकर्मी व प्राइवेट स्कूल के एक शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार किया। लगभग दो वर्ष पहले दोनों ने अपने एक साथी के साथ मिलकर रेलकर्मी से रुपये ठगे थे।
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दिबियापुर थाने के इंस्पेक्टर विनोद कुमार शुक्ला ने बताया कि कानपुर जीएमसी सिकलाइन में टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत एवं दिबियापुर में रामकृष्ण नगर निवासी निवासी चंद्रशेखर पुत्र रामनाथ ने दो अगस्त को बेटे शैलेंद्र राजपूत को सचिवालय में क्लर्क पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर 10.50 लाख रुपये ठग लेने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में दरोगा जितेंद्र कुमार ने ठगी के आरोपी सहदेव नारायण विंद पुत्र अमृत लाल निवासी रेलवे कालोनी फजलगंज और राजेश सिंह पुत्र बालेश्वर सिंह निवासी दर्शन पुरवा कानपुर को गिरफ्तार किया है।
पीड़ित चंद्रशेखर ने दो अगस्त 2019 को दिबियापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके साथ वरिष्ठ टेक्नीशियन सहदेव नारायण विंद निवासी मेजा इलाहाबाद हालपता फजलगंज रेलवे कालोनी कानपुर कार्यरत हैं। सहदेव एक दिन कानपुर में ही प्राइवेट स्कूल में शिक्षक राजेश सिंह निवासी दर्शनपुरवा कानपुर को लेकर दिबियापुर स्थित घर आया। बातचीत के दौरान कहा कि वह उनके पुत्र शैलेंद्र कुमार की नौकरी लखनऊ सचिवालय में लगवा देगा। उनके परिचय के आईएएस मयंक श्रीवास्तव लखनऊ सचिवालय में हैं। नौकरी लगवाने के एवज में 10.50 लाख रुपये की मांग की।
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उनकी बातों में आकर पीड़ित ने अलग-अलग तिथियों में 10.50 लाख रुपये तीनों आरोपियों को दिया। दो जून 2018 को मयंक ने पुत्र के व्हाट्सएप पर एक चयन सूची डाली। इस सूची में चौथे नंबर पर बेटे का नाम था। गंभीरता से जांच करने पर सूची वर्ष 2016 की निकली। इस संबंध में जब मयंक से आपत्ति जाहिर की तो उसने बताया कि हम आपका चयन वर्ष 2016 की सूची में कराएंगे। यही नहीं उसने फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया। शक होने पर इस संबंध में जानकारी की गई तो पता चला कि सचिवालय में इस प्रकार की कोई नियुक्ति नहीं हुई है। मयंक श्रीवास्तव कानपुर में ही एक एनजीओ संचालित करता है। वह फर्जी आईएएस बनकर उनसे मिला था।
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