ग्राम फतेहपुर के जूनियर हाई स्कूल परिसर में चल रही देवी एवं भागवत कथा के दौरान आचार्य पंडित हरि गोविंद बाजपेयी ने कहा कि जब मनुष्य के सदाचार पर दुराचार, मानवता पर दानवता, आध्यात्मिक पर भौतिकता, आस्था पर अनास्था और नैतिकता पर अनैतिकता पूर्ण रूप से छा जाते है, तब संस्कृति के पतन कासमय होता है।
जागृत होना होगा, अच्छे कर्मो से संस्कृति की रक्षा करनी होगी।
बुधवार को भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए कथावाचक ने कहा कि जीवन का अर्थ हाड़-मांस का चलता फिरता शरीर ही नहीं है। जीवन का अर्थ सदाचार, उच्च विचार, परोपकार, ईश्वर ध्यान आदि है। ऐसे कर्म मनुष्य को उन्नति की ओर ले जाते हैं।
इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा के सभी रूप शैलपुत्री, बह्रमचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, कात्यानी, स्कंदमाता, कालरात्रि का वर्णन किया और महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचारी का जन्म होता है, उनके विनाश के लिए भगवान अवश्य अवतरण लेते हैं। कहा कि गाय, गंगा, भगवान और संत इनके साथ किए गए बर्ताव ही जीवन का निर्धारण करते हैं। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।