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पराली जलाने पर 24 घंटे के अंदर 14 किसानों पर हुई एफआईआर

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औरैया। एनजीटी और प्रदेश सरकार की सख्ती का असर दिखने लगा है। जिला प्रशासन ने पराली जलाने के मामले में 24 घंटे के अंतराल में विभिन्न थानों में 14 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई हैं। जबकि 20 दिनों में 236 किसानों पर पांच लाख 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोताही बरतने पर औरैया तहसील के एक लेखपाल को मंगलवार को निलंबित, 32 को चेतावनी तथा एसडीएम बिधूना पर पांच हजार रुपये वसूली का नोटिस दिया गया है। प्रशासन की इस कार्यवाही से किसानों, अधिकारियों और लेखपालों में हड़कंप मचा है।
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जिले में पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए तहसीलवार सघन निगरानी की जा रही है। सेटेलाइट सर्वे और स्थलीय जांच के आधार पर जनपद के 273 किसानों को कृषि विभाग ने नोटिस जारी किए हैं। जबकि इनमें से 14 किसानों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। 236 किसानों पर पांच लाख 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 20 किसानों से 50 हजार रुपये की वसूली भी की चुकी है। बाकी किसानों से वसूली की कार्रवाई तहसील कर्मियों द्वारा की जा रही है। पराली जलाने से रोकने में नाकाम रहने पर औरैया तहसील के भरसेन के लेखपाल नीलेश को निलंबित किया गया है, 15 लेखपाल एवं 11 प्राविधिक सहायक कृषि को प्रतिकूल चरित्र की प्रविष्टि दी गई। साथ ही 32 लेखपाल और 11 पुलिस चौकी प्रभारियों को चेतावनी जारी की गई है। लापरवाही बरतने पर एसडीएम बिधूना से पांच हजार रुपये अर्थदंड वसूली का नोटिस जारी किया गया है। पराली जलाए जाने की 14 घटनाओं में प्रति घटना पांच हजार रुपये की दर से संबंधित पुलिस चौकी, थाना प्रभारी, ग्रामप्रधान, पंचायत सचिव, प्राविधिक सहायक, कानूनगो, लेखपाल पर बराबर अर्थदंड आरोपित करते हुए कुल 70 हजार रुपये की वसूली का नोटिस जारी किया गया है।
उप कृषि निदेशक विजय कुमार कहना है कि एनजीटी के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा। किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
इनसेट
सेटेलाइट से पकड़ीं गईं 59 घटनाएं
औरैया। केंद्र सरकार द्वारा पराली जलाने की घटनाओं का समय-समय पर सेटेलाइट के माध्यम से सर्वे कराया जाता है। इस सेटेलाइट सर्वे में औरैया जनपद में पराली जलाने की लगभग 59 घटनाओं को चिह्नित किया गया। जिसमें संबंधित किसान और कर्मचारी पर जुर्माना लगाया गया है।
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किसानों से पराली न जलाने की अपील की
औरैया। डीएम अभिषेक सिंह ने कहा कि एनजीटी और प्रदेश सरकार के निर्देशों का पालन सख्ती से कराया जा रहा है, जो किसान पराली जलाते पकड़े जा रहे हैं। उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे पराली को न जलाएं। पराली में आग लगाने से भूमि की उर्वरक क्षमता खत्म होती है और प्रकृति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पराली जलाने से खेती के लिए उपयोगी कीट नष्ट हो जाते हैं। पराली को कूटकर जुताई करने और पानी देने से वह खेत में कंपोस्ट का काम करती है।
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