औरैया। गांवों में सरकार की सबसे अहम इकाई माने जाने वाले पंचायत सचिवालय खुद अव्यवस्था का शिकार होते जा रहे हैं।
जिन सचिवालयों को ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं का केंद्र बनना था वहां मंगलवार को दोपहर तक ताले लटके मिले। कहीं पंचायत सहायक गायब मिले तो कहीं सचिव को ही यह जानकारी नहीं थी कि सचिवालय बंद क्यों है। इसके चलते ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी तहसील और ब्लॉक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सरकार ने पंचायत सचिवालयों को गांव स्तर पर मिनी प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य था कि ग्रामीणों को प्रमाणपत्रों, पेंशन, आवास, मनरेगा, परिवार रजिस्टर, जन्म-मृत्यु संबंधी दस्तावेज, किसान पंजीकरण, शिकायतों और ऑनलाइन सेवाओं के लिए शहर या तहसील न जाना पड़े।
हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि कई सचिवालय नियमित रूप से नहीं खुल रहे हैं। इससे गांव की सरकार कागजों तक सिमटती दिखाई दे रही है। मंगलवार को विभिन्न ग्राम पंचायतों में सचिवालयों की पड़ताल की गई तो स्थिति चिंताजनक मिली।
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केस-1
बिधूना की ग्राम पंचायत सबहद कटरा में 12:38 बजे पंचायत भवन बंद मिला। सचिव नृपेंद्र यादव से फोन पर जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि सचिवालय बंद होने की जानकारी उन्हें नहीं है। यदि सचिवालय बंद पाया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी। सचिव के इस जवाब ने व्यवस्था पर और सवाल खड़े कर दिए कि गांव का सचिवालय बंद है और संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी तक नहीं।
केस-2
बिधूना की ही ग्राम पंचायत वसई में दोपहर 12:52 बजे तक पंचायत सचिवालय पर ताला लटका मिला। मौके पर मौजूद ग्राम प्रधान राजवीर ने बताया कि पंचायत सहायक की शादी हो जाने के कारण नई नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जरूरी कार्य होने पर सचिवालय खोला जाता है और सचिव जरूरत पड़ने पर आते हैं।
केस-3
ग्राम पंचायत मुड़ियाई में दोपहर 1.03 बजे पंचायत सचिवालय बंद मिला। पंचायत सहायक शिवम यादव ने फोन पर बताया कि उनकी तबीयत खराब हो गई थी जिसके चलते वह करीब एक बजे सचिवालय बंद कर घर चले गए थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सचिवालय का समय निर्धारित होने के बावजूद अक्सर वहां कर्मचारी नहीं मिलते।
केस-4
एरवाकटरा के ग्राम कुकरकाट के पंचायत सचिवालय में दोपहर 12:40 बजे ताला लटकता मिला। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत सहायक की शादी हो गई है और वह अधिकतर समय अपनी ससुराल में रहती हैं। पिछले कई माह से पंचायत घर नहीं खुल रहा है। मजबूरन लोगों को अपने काम के लिए ब्लॉक के कर्मचारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
केस-5
कुदरकोट की ग्राम पंचायत रामपुर खास के सचिवालय में लंबे समय से ताला लगा हुआ है। सचिवालय के बाहर अब भी पूर्व सचिव मुशीर अहमद का नाम अंकित है। वर्तमान में कार्यरत सचिव अनुज यादव का नाम अभी तक नहीं लिखा गया है। यहां न सचिव मिले न सहायक।
तहसीलों के काटने पड़ रहे चक्कर
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्हें सिर्फ एक हस्ताक्षर या सत्यापन के लिए कई दिनों तक सचिव और पंचायत सहायकों की तलाश करनी पड़ती है। मसूदपुर गांव निवासी मनसुख लाल ने बताया कि पंचायत सचिवालय अक्सर बंद रहता है। जब कोई जरूरी काम पड़ता है तो उन्हें बिधूना तहसील तक जाना पड़ता है जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।
जगदीश ने कहा कि सचिव कब आता है और कब चला जाता है इसका कोई निश्चित समय नहीं है। गांव के लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है लेकिन जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिलते।
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इस समय गांव-गांव फार्मर रजिस्ट्री और वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम हटाने का विशेष अभियान चल रहा है। कई पंचायत सहायकों को जिला मुख्यालय भेजा गया है। गांवों में कैंप लगाकर भी कार्य कराया जा रहा है। इसी वजह से कुछ सचिवालयों में पंचायत सहायक नियमित रूप से नहीं बैठ पा रहे हैं।
- रामदुलार, प्रभारी खंड विकास अधिकारी, बिधूना
फोटो-29-बिधूना ब्लॉक की ग्राम पंचायत रुरुखुर्द में कई माह से बंद पड़ा सचिवालय। संवाद- फोटो : रेवती देवी इंटर कॉलेज में छात्राओं को कथक की जानकरी देती हुई प्रशिक्षिका। स्रोत: विद्यालय
फोटो-29-बिधूना ब्लॉक की ग्राम पंचायत रुरुखुर्द में कई माह से बंद पड़ा सचिवालय। संवाद- फोटो : रेवती देवी इंटर कॉलेज में छात्राओं को कथक की जानकरी देती हुई प्रशिक्षिका। स्रोत: विद्यालय
फोटो-29-बिधूना ब्लॉक की ग्राम पंचायत रुरुखुर्द में कई माह से बंद पड़ा सचिवालय। संवाद- फोटो : रेवती देवी इंटर कॉलेज में छात्राओं को कथक की जानकरी देती हुई प्रशिक्षिका। स्रोत: विद्यालय