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जीव कभी अहंकार नहीं करे

Tue, 26 May 2015 12:34 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, औरैया।
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बाबरपुर में चल रही श्रीमद भागवतकथा में पंडित गोपाल दुबे ने कहा कि अहंकार से जीव का पतन होता है।
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जब इंद्र को अहंकार हो गया तो भगवान श्रीकृष्ण ने उनका अहंकार चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया था।

वृंदावन वासियों की रक्षा की थी। जीव को कभी अहंकार के वशीभूत नहीं होना चाहिए। सदैव सत्कर्म कर ईश्वर को याद करना चाहिए। अगले प्रसंग में गोपाल दुबे ने श्रीकृष्ण की बाल लीला, चीर हरण, रुकमणि विवाह का का वर्णन प्रस्तुत किया।

संतों को कभी एक स्थान पर नहीं ठहरना चाहिए। जिस प्रकार पानी के ठहराव से जल खराब हो जाता है। उसी प्रकार संतों के एक स्थान पर ठहरने से उसमें अवगुणों का समावेश हो जाता है।
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कंचौसी ढिकियापुर गमादेवी मंदिर पर भागवतकथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ।  कार्यक्रम आयोजक पूर्व प्रधान अजय सिंह ने बताया कि एक सप्ताह तक चलने वाली कथा का समापन 28 मई व प्रसाद वितरण 29 मई को होगा।

श्रीमद्भागवतकथा के दौरान पंडित रामशंकर तिवारी ने कहा कि पाप से अर्जित अन्न खाने से बुद्घि व विवेक दोनों नष्ट हो जाते है। मनुष्य का नैतिक पतन हो जाता है और वह विलासिता के  जीवन में अपना स्थायी सुख-चैन भी गंवा देता है।
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पहले आंख भटकती है, फिर मन भटकता है, इसके बाद मानव का नैतिक पतन शुरू हो जाता है। यह नैतिक पतन घर, परिवार, समाज के मूल्यों का ह्रास जारी हो जाता है। कथा श्रवण के दौरान दिनेश तिवारी, महेश, सुरेश तिवारी मौजूद रहे।



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