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Auraiya News: दुष्कर्म और धोखाधड़ी मामले में अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने का आदेश रद्द

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औरैया। महिला थाने से जुड़े एक गंभीर मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसके तहत पुलिस की ओर से लगाई गई अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया था।
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सत्र न्यायालय ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है। उसने वादिनी को अपना पक्ष रखने के लिए एक और अवसर प्रदान करने का निर्देश दिया। दिबियापुर थाना क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत की थी। उसने कन्नौज के इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के निकारीपुर निवासी अरविंद कुमार पर आरोप लगाए। महिला का कहना था कि शादी से पहले और बाद में भी उसके अरविंद से प्रेम संबंध थे। आरोपी ने करीब 13 वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। उसने महिला से रुपये भी लिए और बाद में जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर 27 मई 2023 को महिला थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के बाद पुलिस ने मामले में अंतिम आख्या प्रेषित की। वादिनी ने इसके विरोध में निचली अदालत में एक विरोध याचिका दाखिल की थी। सिविल जज ने 28 मई 2025 को एक आदेश पारित किया। इसमें वादिनी की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई थी।
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इस आदेश के खिलाफ मनीषा देवी ने सत्र न्यायालय में दांडिक पुनरीक्षण दाखिल किया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने कहा कि नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत है कि किसी भी वाद का निस्तारण गुणदोष के आधार पर हो। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए। वादिनी पूर्व में कई तारीखों पर उपस्थित रही थी। सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का 28 मई 2025 का आदेश रद्द कर दिया है।
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