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‘खुले में शौच जाना सामाजिक बुराई’

Sun, 08 May 2016 12:43 AM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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मेधावियों को लैपटाप देते कमिश्नर और अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत आयोजित कार्यशाला में कमिश्नर मो. इफ्तिखारुद्दीन ने कहा कि खुले में शौच जाना सामाजिक बुराई है। इसे दूर करना प्रत्येक नागरिक, अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी है। खुले में शौच जाने का प्रतिफल यह होता है कि गंदगी पर बैठकर आईं मक्खियां घरों में खाने पर बैठती हैं। इससे फैली डायरिया जैसे बीमारियों से प्रतिवर्ष देश में तीन लाख से अधिक शिशुओं की मौत हो जाती है।
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गेल गांव के आडीटोरियम में आयोजित कार्यशाला में कमिश्नर ने कहा कि तमाम तरह की चुनौतियों के बावजूद देश ने तरक्की की है। लेकिन यह शर्म की बात है कि भारत में खुले स्थान पर शौच करने वालों की संख्या में विश्व की कुल संख्या की 60 फीसदी है। इस सामाजिक बुराई को दूर करने के लिए जिले में अच्छी शुरुआत हुई है। डीएम माला श्रीवास्तव ने ग्रामीणों से खुले में शौच न जाने का आह्वान किया। इससे पूर्व प्रेरक रश्मि एवं रीतू ने स्वच्छता गीत प्रस्तुत किया। कमिश्नर ने 50 मेधावियों को लैपटाप, 20 किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड, 10 आम आदमी बीमा योजना की पालिसी बांटी।

कार्यक्रम में एसपी अतुल शर्मा, एडीएम एके सिंह, सीडीओ सत्येंद्र नाथ चौधरी, जिला पंचायत राज अधिकारी राजेंद्र प्रकाश, डीआईओएस, बीएसए राजेश श्रीवास, एसडीएम जितेंद्र श्रीवास्तव, सीओ सुभाष अत्री अदि अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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