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सीएमओ की दया पर चल रही ओपीडी

Wed, 04 May 2016 11:46 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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एक मेज का दवा वितरण खिड़की - फोटो : amar ujala beuro
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 जिले की एक बड़ी आबादी की सेहत संभालने के शहरी अस्पताल को जिला अस्पताल तो घोषित कर दिया गया है। लेकिन ओपीडी में आने वाले लगभग 250 से 300 रोगियों के इलाज के लिएजिला अस्पताल के हाथ खाली हैं। बस काम चलाया जा रहा है। उधार की दवाइयां ही (सौ शैय्या अस्पताल की) रोगी को मिल पा रही हैं। डाक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी व संसाधनों के अभाव ने जिला चिकित्सालय बस नाम का जिला अस्पताल बना है। सीएमओ कार्यालय की दया पर संचालित जिला अस्पताल का बुधवार को अमर उजाला ने पड़ताल की तो हालात कुछ इस तरह नजर आए।
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बिखरे संसाधन, नहीं है धन
यदि यह कहें कि जिला अस्पताल का संचालन जनता को भरमाने भर को किया जा रहा है तो कोई गलत न होगा। नए भवन में संचालित जिला अस्पताल की ओपीडी में लगभग शून्य संसाधनों के बाद भी प्रतिदिन करीब 300 तक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। पड़ताल के दौरान जिला अस्पताल की ओपीडी के कुल पांच कक्ष खुले दिखाई दिए। तीन कक्षों में डाक्टर और दंत चिकित्सक के कक्ष में पर्चा काउंटर तथा एक कक्ष को दवा स्टोर रूम का रूप देकर मरीजों को दवाइयां दी जाती दिखाईं दीं। वहीं ओपीडी परिसर के एक कोने में बजट के अभाव में रखा खराब कूलर व टूटा फर्नीचर नजर आया।

दोपहर 12 बजे तक 190 रोगी
आम जनता की जरूरत देखिए साहब, बजट, संसाधन और मैनपावर की कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में दोपहर 12 बजे तक 190 रोगियों  के पर्चे काटे गए। मरीजों के सपेक्ष सीमित डाक्टरों की संख्या के चलते ओपीडी की हालत एक अनार सौ बीमार जैसी दिखाई दी। ओपीडी गेट से लेकर ओपीडी परिसर में चारों तरफ मरीज इलाज के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हुए नजर आए। वहीं चिकित्सकों के कक्ष में भी रोगियों की अच्छी खासी संख्या दिखाई दी।
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कहीं देखा और सुना है ऐसा अस्पताल
जिला अस्पताल प्रदेश का शायद इकलौता अस्पताल होगा। जहां वार्ड ब्वाय की तैनाती नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी के नाम पर यहां केवल एक ही सफाईकर्मी तैनात है। सीएमएस को मिलाकर डाक्टर तो तीन हैं, लेकिन उनमें एक डाक्टर संविदा पर है। जबकि दया भाव दर्शाते हुए जिला अस्पताल की ओपीडी में से दो डाक्टर सीएमओ कार्यालय की ओर से समर्पित हैं।  

शहरी अस्पताल को जिला अस्पताल का दर्जा देने के बाद शासन से बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है। 15 मई के करीब बजट प्राप्त होने की उम्मीद है। फिलहाल बेसिक कमी को पूरा कराने के लिए 2.5 लाख का स्टीमेट तैयार किया गया है।
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डा. प्रमोद कटियार, सीएमएस
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