पछैयां बस्ती में दो दशक पुराना अवैध शराब का कारोबार बंद हो गया है। दो दिन से किसी भी घर में शराब नही बनाई गई। मंगलवार सुबह जब कुछ लोग शराब खरीदने पहुंचे तो महिलाओं और युवाओं ने उन्हें भगा दिया। कहा कि अब यहां कभी शराब नही मिलेगी।
औरैया की पछैयां बस्ती में करीब बीस साल से अवैध शराब का कारोबार हो रहा है। यहां पर कभी पुलिस छापा मारती तो कभी शराबी गालियां बकते। शहर में भी कोई इन बस्तियों के लोगों को इज्जत की नजर से नही देखता। यह सब नई पीढ़ी को रास नहा आ रहा था। अमर उजाला ने जब उनके पुनर्वास का मुद्दा उठाया तो प्रशासन भी खड़ा हो गया। उन्हें योजनाएं और दूसरे धंधे के लिए ऋण दिलाने की घोषणा कर दी। इसके बाद सभी महिलाओं ने एकजुट होकर इस धंधे से तौबा कर ली। बस्ती में शराब न बनाने का फरमान जारी कर दिया। युवाओं ने भी इसमें बढ़चढ़ कर भागीदारी की।
सूचना पर डीएम माला श्रीवास्तव ने एसडीएम व पूर्ति निरीक्षक टीम को भेजकर बस्ती के लोगों की सूची बनवाई। राशनकार्ड और योजनाओं का लाभ देने के लिए समूह बना दिए। डीएम व एसडीएम ने यहां के लोगों को हर संभव मदद और बैंकों से योजनाओं पर वरीयता से ऋण दिलाने का आश्वासन दिया है। अब पछैयां बस्ती वालों के चेहरे पर चमक है। दो दिन से पछैयां बस्ती में शरब की एक बूंद नही बन रही है। ऐसे में बस्ती में शराब के पियक्कड़ सुबह से शराब लेने पहुंच गए। इस पर महिलाओं और युवाओं ने उन्हें खदेड़ दिया। कहा कि आज से यहां मत आना। यहां पर अब कभी शराब नही मिलेगी।