बरसात शुरू होने वाली है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ेगा। इसके कारण डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां पैर पसार सकती हैं। इनसे बचने के लिए मलेरिया विभाग के पास कोई इंतजाम नही है। जिले में मलेरिया विभाग तो है, मगर इस विभाग के हाथ खाली हैं। विभाग के पास कोई टीम नही है। चंद संविदा कर्मियों के सहारे ही विभाग संचालित है। मच्छर से होने वाली बीमारियों की जांचों के लिए विभाग सैंफई व कानपुर के भरोसे है।
बरसात के समय मच्छरों के काटने से होने वाले रोगों से रोकथाम के लिए मलेरिया विभाग को रूपरेखा तैयार करनी होती है। मगर जिले मे मलेरिया विभाग ने कभी कोई रूपरेखा तैयार नही की। विभाग के पास अपने कर्मचारी तक नही हैं। संविदा कर्मचारियों से काम निकालना पड़ता है। यही संविदा कर्मचारी दूसरे कामों में भी व्यस्त रहते हैं। ऐसे में उन बस्तियों का चिन्हीकरण तक नही हो पाता जिनमें यह रोग फैलने की अधिक आशंका हो।
विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पीएचसी व सीएचसी तथा जिला अस्पताल में मलेरिया रोगियों की स्लाइड बनकर इलाज तो हुआ। फ ाइलेरिया की भी जांच करने का दावा विभाग कर रहा है। लेकिन पिछले सत्र में एक भी मरीज विभाग को नही मिला। डेंगू की जांच तक विभाग नही कर पाता है। ऐसे में कुछ लक्षण मिलने पर मरीजों को सैंफई या कानपुर ही भागना पड़ता है। विभाग को पिछले सत्रों में अपने जिले से डेंगू पीड़ित मरीजों की संख्या तक नही मालूम है। जबकि कानपुर और सैंफई में जिले के कई लोग भर्ती हुए थे।
क्या कहते जिम्मेदार
मलेरिया विभाग के अधिकारी डा. आजाद बताते हैं कि उनके विभाग को कर्मचारियों की कमी से जूझना पड़ रहा है। विभाग के पास कोई अतिरिक्त बजट नही है। जिससे कार्ययोजना तैयार की जा सके। उन्होंने माना कि उनके पास डेंगू जांच की कोई व्यवस्था नही है। पीएचसी व सीएचसी में ब्लीचिंग और क्लोरीन के अलावा डीडीटी भिजवाई गई है।
इनसे फैलते हैं यह रोग
मच्छर रोग इनके जन्मदाता
एनफि लीस मलेरिया जमा गंदा पानी
क्यूलेक्स फ ाइलेरिया नाली में भरा कूड़ा
एडीज डेंगू जमा साफ पानी में