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अनाज ही नहीं चारे का भी संकट

Mon, 20 Apr 2015 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
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बेमौसम बारिश ने अनाज के साथ ही चारे का भी संकट खड़ा कर दिया है। अप्रैल माह के पहले सप्ताह में हुई बारिश से दाने के साथ भूसा नष्ट हो गया है। ऐसे में पशुपालकों के सामने चारा की समस्या खड़ी हो गई है।
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जिले में खरीफ सीजन में 97645 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई हुई थी। जबकि रबी सीजन में 105010 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं बोया गया है। जुलाई में उपजी सूखे की स्थिति में प्रशासनिक सर्वे में फसलों को 15-20 फीसदी नुकसान होना दर्शाया गया था।



वहीं जिला प्रशासन के सर्वेे के अनुसार मार्च/अप्रैल 2015 की बेमौसम बारिश से चना 51 तो अरहर की 51 फीसदी फसल नष्ट होने के साथ ही गेहूं की फसल 35 से 40 फीसदी खराब हुई हैं।  जिले में रबी सीजन में 760, खरीफ सीजन में 1816 तो जायद फसली सीजन में 90 हेक्टेयर क्षेत्र में पशु चारे की पैदावार की जा रही है। लेकिन इस बार चारे का संकट है।
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खास बात यह भी कि पिछले तीन वर्षों से पशु चारा उत्पादन क्षेत्रफल की वृद्धि भी स्थिर बनी हुई है। वर्ष 2010-11 की रबी सीजन में 753, 2011-12 में 783 तथा 2012-13 से जिले में  760 हेक्टेयर भूमि पर पशुचारे का उत्पादन किया जा रहा है।



अब इस बार के रबी सीजन की फसलें चना, अरहर, मटर, जौ, गेहूं आदि की फसलें काफी हद तक प्रभावित हुई है। गेहूं की फसल तो सरकारी स्तर से जारी की फसली नुकसान की रिपोर्ट 50-60 फीसदी प्रभावित हुई। ऐसे में पशुओं के हरा चारा और भूसे पर संकट के बादल मड़राते दिखाई दे रहे हैं।



क्या कहते हैं जिम्मेदार- भूसे-चारे की जनपद में कोई कमी नहीं हैं। बेमौसम से बारिश से गेहूं पर तोनुकसान हुआ है। पर इससे भूसे के उत्पादन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।- डा. अजयकांत कुलश्रेष्ठ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी 
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