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कयाकल्प के 14 बिंदुओं से भी नहीं बदल पाई स्कूलों की सूरत

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औरैया। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय स्कूलों की सूरत सुधारने के लिए 14 बिंदु तय किए गए। इसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर वातावरण देना और शिक्षा का स्तर सुधारना था। लेकिन जिले में यह योजना मानकों पर खरी उतरती नहीं दिख रही है। हाल ये है कि 1265 परिषदीय स्कूलों में 50 फीसदी मानकों पर खरे नहीं हैं। कहीं पर बाउंड्रीवाल नहीं है, तो कहीं विकलांग बच्चों के लिए शौचालय नहीं बने हैं। फर्श और गेट टूटा है।
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सभी स्कूलों में 14 बिंदुओं पर कार्य कराने के लिए शिक्षक व प्रधानों को जवाबदेह बनाया गया। खंड विकास कार्यालयों को निर्देश भी दिए गए। लेकिन स्कूलों की सूरत बदलती नहीं दिख रही।
य़े कार्य होने थे
जिले में प्राइमरी, जूनियर व कंपोजिट स्कूलों समेत लगभग 1265 परिषदीय स्कूल हैं। इन स्कूलों को आकर्षक और पठन योग्य बनाने के लिए 14 बिंदु जैसे रंगाई पुताई, ग्रीन बोर्ड, कक्षों में वायरिंग व मल्टीपल हैंडवाश, दिव्यांग रैम्प आदि कार्य शिक्षकों को कंपोजिट ग्रांट से कराने थे। वहीं बालक बालिका के लिए अलग शौचालय, इंटरलॉकिंग, टाइल्स व रसोईघर का निर्माण आदि कार्य प्रधानों द्वारा ब्लाक स्तर पर ग्राम पंचायत की मद से कराए जाने थे।
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अधूरे चल रहे कार्य
कायाकल्प योजना के तहत अभी भी अधिकांश विद्यालयों में मल्टीपल हैंडवाश शो पीस है तो कहीं चहारदीवारी नहीं है। काफी स्कूलों में अभी टाइल्स का काम बाकी है। कुछ स्कूलों में रनिंग वाटर सिस्टम क्रियाशील नहीं है। शासन प्रति माह शिक्षकों से सूचना मांगता है पर पंचायत स्तर पर हीलाहवाली के चलते ये कार्य अधूरे पड़े हैं।
वर्जन
जिले के सभी स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराने के निर्देश है। सभी जगहों पर कार्य हो भी गए हैं। इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। जहां पर अधूरे काम पड़े हैं, उन्हें भी शीघ्र पूरा करा दिया जाएगा। - चंदना राम इकबाल, बीएसए
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