औरैया। जिले में रविवार को आयोजित हुए आरोग्य मेलों में कुछ केंद्रों पर अव्यवस्था और संसाधनों की कमी सामने आई। कहीं महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं थी तो कहीं खून की जांच संभव नहीं हो सकी।
इससे मरीजों को लौटना पड़ा। कहीं पानी, शौचालय तो कहीं साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव मिला। शासन की गाइडलाइन के अनुसार हर आरोग्य मेले में पुरुष व महिला दोनों डॉक्टरों की मौजूदगी के साथ-साथ प्राथमिक जांच सुविधाएं अनिवार्य हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई।
उमरैन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर महिला मरीजों के इलाज के लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं है। परिसर में लगा एकमात्र हैंडपंप खराब पड़ा है, जिससे पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। शौचालय है, लेकिन उसमें भी पानी नहीं है। पिछले चार वर्षों से पीएचसी में रंगाई-पुताई तक नहीं कराई गई, जिससे यह केंद्र खुद ही बीमार नजर आता है।
वहीं, बेला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पुर्वा सुजान में डॉ. आलोक कुमार दुबे, फार्मासिस्ट मिराज अहमद, वार्ड बॉय अवनीश कुमार और लैब टेक्नीशियन देवेंद्र कुमार मौजूद रहे। दोपहर एक बजे तक 21 मरीज पहुंचे, जिनमें बुखार, खुजली व अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग शामिल थे लेकिन सीबीसी मशीन न होने के कारण खून की सीबीसी जांच नहीं हो सकी। सिर्फ मलेरिया की जांच ही हो पाईं।
अछल्दा के पीएचसी मुहम्मदाबाद में डॉ. बी.के. सिंह, फार्मासिस्ट दीपक कुमार और सीएचओ कमलेश मौजूद मिले। यहां दोपहर एक बजे तक 29 मरीज पहुंचे। अधिकतर बुखार, खुजली और गैस की समस्या से जूझ रहे थे। जांच की सुविधा पीएचसी पर उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को सीएचसी भेजा जा रहा है।
अजीतमल क्षेत्र के ग्राम गंगादासपुर स्थित पीएचसी पर आयोजित आरोग्य मेले में डॉ. सेवेंद्र सिंह ने मरीजों की जांच की और फार्मासिस्ट विवेक मिश्रा ने दवाएं वितरित कीं। डॉ. सेवेंद्र के अनुसार इस समय सर्दी, जकड़े बुखार, खांसी और पेट दर्द के मरीज अधिक हैं। यहां कुल 38 मरीजों का परीक्षण हुआ, लेकिन खून की जांच नहीं हो सकी। न ही यहां महिला डॉक्टर मिलीं।
सभी जगह जांच मशीनों की उपलब्धता कराई जा रही है। कई जगह जहां महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं है, वहां दूसरी जगह से महिला चिकित्सकों को भेजा। व्यवस्था ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ
फोटो-17-उमरैन पीएचसी में मरीज देखते चिकित्सक। संवाद