औरैया। भगवान से मनाइए कि रात में आपका कोई परिजन बीमार न हो और न ही कोई हादसा हो।
क्योंकि कम से कम अपने जिले में रात में इलाज नहीं मिलने वाला। इसलिए ऊपर वाले पर भरोसा रखिए और कुछ इंतजाम कर आसपास के जिले में इलाज के लिए प्रस्थान कीजिए। राहत की उम्मीद लिए आप मेडिकल काॅलेज जाएंगे तो यहां आपका दर्द और बढ़ा दिया जाएगा। डाॅक्टर बिना कोई जांच किए तुरंत मरीज को कानपुर या सैफई ले जाने की सलाह देकर एक रेफर स्लिप थमा देंगे।
फिर चाहे मरीज हादसे का शिकार हुआ हो या उसे अस्थमा का अटैक पड़ा हो। हम तो सिर्फ रेफर करते हैं। कानपुर या सैफई जाने के लिए एंबुलेंस की मांग कर दी तो आपसे कहा जाएगा कि टोल फ्री नंबर पर फोन कीजिए जब एंबुलेंस आ जाए तो चले जाइएगा। बाहर इंतजार कीजिए हमारी नींद में खलल न डालिए।
अमर उजाला की टीम ने बुधवार देर रात चिचौली मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत परखने का प्रयास किया। यहां इमरजेंसी में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल थीं। कुल सात मरीज भर्ती थे। जिनमें एक हृदय रोगी की हालत गंभीर थी। बाकी सभी सांस व बुखार के रोगी हैं। आप खुद देखिए कि इमरजेंसी में कैसे इलाज हो रहा है।
रेफर स्लिप मिल गई अब सड़क पर एंबुलेंस का इंतजार
सीन-01)
करीब साढ़े नौ बजे उसरारी निवासी बृजेंद्र (18) व रवि (18) को घायल हालत में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया। बाइक से जाते समय उन्हें ट्रैक्टर ने टक्कर मार दी थी। दोनों के पैर टूट गए। इमरजेंसी में दोनों की ड्रेसिंग व पट्टी (फर्स्ट एड) कर गई। लेकिन इमरजेंसी में तैनात डॉ. हिमांशू की ओर से जांग की हड्डी के लिए चारों ओर से एक्सरे व ऑपरेशन की सुविधा न होने का हवाला दे दिया गया। दोनों घायलों के साथ आए करीब 40 से 50 लोग बस दोनों की सलामती के लिए हाय-तौबा कर रहे थे। अंतिम विकल्प के तौर पर रेफर पर्ची तीमारदारों को थमा दी गई।
बाहर निकले परिजन कुछ देर तक इधर-उधर अस्पतालों की जानकारी करते रहे। इमरजेंसी के बाहर बृजेंद्र को एक वैन में तो रवि को फर्स पर स्ट्रेचर के ऊपर रखकर ग्रामीण काफी देर तक इलाज के लिए मंथन करते रहे। इस बीच रवि के पिता रामपाल ने बताया कि हादसे में बृजेंद्र व रवि घायल हो गए हैं। पैर टूट गए हैं। इमरजेंसी में पट्टी करते हुए दोनों को बोतल चढ़ा दी गई है। इसके बाद बाहर ले जाने की सलाह डॉक्टर दे रहे हैं। यहां जरूरी उपचार न मिल पाने की बात कह रहे हैं। दोनों दर्द से तड़फ रहे हैं। सैफई ले जाना पड़ रहा है। यहां की स्वास्थ्य सेवाएं न के बराबर हैं। इतना इलाज तो किसी सीएचसी-पीएचसी पर भी मिल जाता। आधे घंटे तक इमरजेंसी के बाहर रुकने के बाद परिजन वैन से दोनों घायलों को लेकर सैफई रवाना हो गए।
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रेफर स्लिप लो एंबुलेंस के लिए 102 पर फोन करो
सीन-02)
बिधूना के इकघरा निवासी शिवाकांत दीक्षित को हृदय संबंधी दिक्कत होने पर परिजन श्रीकांत व अन्य लोग उन्हें बिधूना सीएचसी ले गए। जहां से उन्हें चिचौली रेफर कर दिया गया। यहां इमरजेंसी में करीब डेढ़ घंटे शिवाकांत दीक्षित को ऑक्सीजन पर रखा गया। उपचार भी किया गया। लेकिन सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। लगातार शिवाकांत का ऑक्सीजन लेवल डाउन हो रहा था।
ईसीजी के बाद डॉक्टर ने एक किट जांच के लिए बाहर मेडिकल स्टोर से परिजनों से मंगवाई। जांच के बाद मामला गंभीर देख डॉक्टर ने उन्हें कार्डियोलॉजी कानपुर रेफर कर दिया। रेफर पर्ची मिलने के बाद परिजन ऑक्सीजन से लैस बीएलएस एंबुलेंस के लिए 102 पर संपर्क करने लगे। कुछ समझ न आने पर इमरजेंसी के बाहर तैनात गार्ड के पास जा पहुंचे। जहां सुरक्षा कर्मियों ने उनकी मोबाइल से एंबुलेंस दिलाने में मदद की। करीब पौन घंटे की जद्दोजहद के बाद एंबुलेंस आने की उम्मीद जगी। इस बीच परिजन कई बार निराश होकर आसमान की ओर ताकते नजर आए। काश कि सही सलामत शिवाकांत कार्डियोलॉजी पहुंच जाएं। मेडिकल कॉलेज ने तो उन्हें भगवान के भरोसे छोड़कर पल्ला झाड़ लिया।
स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। पहले फेज की सुविधाओं को काफी हद तक ठीक कर लिया गया है। करीब दो माह पहले इमरजेंसी सेवा शुरू की गई है। सीमित संसाधनों से किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। संसाधन पुख्ता करने के लिए शासन को डिमांड भेजी जा चुकी है। जो भी कमियां हैं, उन्हें सुधारा जाएगा। -डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज