यमुना की तलहटी हो या सेंगर नदी का कछार सभी स्थानों पर नील गाय का कहर किसानों पर मुसीबत बनकर टूट रहा है। दिन और रात में खेतों में नील गायों के हमले से किसान बर्बाद हो रहे है।
किसानों की खेतों में खड़ी मूंग, खरबूज, तरबूज, ककड़ी आदि फसलों को नील गाय नष्ट कर रही है। किसानों ने नील गायों पर अंकुश लगाए जाने की मांग की है।
पहले तेज बारिश, आंधी से फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं। अब नील गाय के कहर से किसान परेशान हैं। वह झुंड का झुंड बनाकर खेतों में खड़ी फसल रौंद डालती हैं। -जगत नारायण दुबे (ग्राम, ज्वाला प्रसाद ,नवादा)
पहले यह क्षेत्र उबड़ खाबड़ और दस्यु प्रभावित था। किंतु जब क्षेत्र समतल कराया गया तो किसी प्रकार फसलों की बुवाई शुरू हुई। अब नील गायों ने फसलें चौपट करना शुरू कर दिया है। - चंद्रपाल सिंह (पड़रिया)
नील गायों से फसलों की रखवाली 24 घंटे नहीं की जा सकती है। खेतों में मचान बनाने के बाद भी गाय रात्रि में आ धमकती हैं। रात में गायों को भगाना मुश्किल होता है। जय नारायण तिवारी (ग्राम ककरैया)
सरकार नील गायों से निजात दिलाने के लिए सस्ते खाद, बीज किसानों को मिल सके। नील गाय से मुक्ति मिले तो अन्नदाता समृद्ध हो सकता है। - रामबाबू (बेलाझार)