किसान महोत्सव में आयोजित सांस्क़तिक कार्यक्रमों की श्रंखला में बालिकाओं ने मै बरसाने की छोरी, ना कर मोसे बरजोरी... गीत पर नृत्य कर कार्यक्रम को गति प्रदान की। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा की रेल चली जाए रे... गीत के माध्यम से जिले में बेसिक शिक्षा कार्यालय की भूमिका और उसके अधीन संचालित योजनाओं की जानकारी दी।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ही मेरी लाडली बेटी बोली कि मैया मेरा नाम लिखा दो स्कूल में... गीत प्रस्तुत कर बेटियों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं को रेखांकित करते हुए बेटी पढ़ाओ अभियान से अभिभावकों से जुड़ने को प्रेरित किया। वहीं सम्मेलन में ग्राम पन्हर, सेंगनपुर, त्योरलालपुर, मिलक व भीखेपुर के कृषक कलाकारों ने लोकगीत की श्रंखला में फाग की तर्ज पर जिले के कृषि दर्शन की प्रस्तुति की।
कृषक लोकगीत कलाकार पूरन सिंह, वीरेंद्र सिंह, मनोज सिंह, सियाराम, राजेंद्र सिंह, रामवीर व विजय सिंह राजपूत ने औरैया महोत्सव की विशेषताओं पर फाग शैली में मोए देबो तो दिखाए, औरैया महोत्सव मेला... गीत गाया। जिसे सभी ने सराहा। इन्हीं कलाकारों की ओर से तोए सुमिरन होए शीश नवाए, औरैया वाले बाबा... लोकगीत प्रस्तुत किया। जयचंद्र मिश्रा ने शरीर क्या है इस पर चला गया कोतवाल, छोड़ काया की कोतवाली गीत प्रस्तुत कर सभी की वाह-वाही लूटी।