बंदर काटने वाले मरीज को इंजेक्शन लगाता स्वास्थ्य कर्मी। संवाद
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औरैया। शहर समेत जिले में बंदरों की दहशत चरम पर है। गलियों और छतों पर बंदरों का झुंड रहता है, इससे राहगीरों और बच्चों का निकलना दुश्वार हो गया है। स्थिति यह है कि रोजाना 10 से 12 लोगों को बंदर काट रहे हैं। इनके हमले से घायल लोग इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं।
पूर्व में नगर पालिका ने बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया था, इससे लोगों को काफी राहत मिली थी। हालांकि टेंडर की तीन माह पहले समय सीमा समाप्त होते ही अभियान ठप हो गया। इसके चलते बंदरों का आतंक दोबारा बढ़ गया है। अधिकारियों की खींचतान के बीच आम जनता पिस रही है। पालिकाध्यक्ष अनूप गुप्ता का कहना है कि अब बंदरों को पकड़ने का काम वन विभाग को सौंप दिया गया है, जबकि वन विभाग प्रभागीय वनाधिकारी सीपी सिंह का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई आदेश नहीं आया है।
माहवार पीड़ित मरीजों का आंकड़ा
जनवरी: 50
फरवरी: 72
मार्च: 59
अप्रैल: 24
मई: 57
जून: 47
जुलाई: 39
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वर्जन
अस्पताल में बंदरों के काटने से घायल मरीज लगातार आ रहे हैं। अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन एंटी-वेनम की पर्याप्त उपलब्धता है। जो भी मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, उन्हें उचित इलाज और वैक्सीन दी जा रही है।
- डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, औरैया