ग्राम सुरान स्थित सूखा पड़ा मॉडल तालाब
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तापमान में वृद्धि का सीधा प्रभाव भूगर्भ जलस्तर पर पड़ रहा है। जिले में ताल-तलैया सूखने से पानी संकट और भी गंभीर हो गया है। हालात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए गए आदर्श तालाबों से भी पानी गायब हो गया है। मनरेगा में लाखों का बजट होने के बाद भी इनके रखरखाव की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में आम लोगों से लेकर पशुआें तक के लिए पानी का संकट बढ़ गया है।
साल 2009 की बसपा सरकार ने जिले की सभी ग्राम पंचायतों में पर्यटन विकसित करने और पानी संकट को कम करने के लिए आदर्श तालाबों का निर्माण कराया गया था। जिले में 441 मॉडल तालाबों के निर्माण पर 1200 लाख रुपये की सरकारी धनराशि खर्च की गई थी। 2012 में तत्कालीन सरकार के पतन के बाद मॉडल तालाबों के रखरखाव की ओर ध्यान नहीं दिया गया। इनकी हालत अनाथों जैसी हो गई है। हालत यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग सभी ताल-तलैया और पोखरे सूख गए हैं। मॉडल तालाबों में भी पानी नहीं है। रविवार को अमर उजाला ने माडल तालाबों की पड़ताल की।
समय का फेर, आज हैं ढेर
औरैया। शहर की सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत बरमुपुर में ग्राम सभा की भूमि के अभाव में साल 2011 में तत्कालीन डीएम उदय प्रताप सिंह ने स्थानीय कृषि उत्पादन मंडी समिति की भूमि पर मॉडल तालाब बनाने की स्वीकृति प्रदान की थी। निर्माण कराए गए इस मॅाडल तालाब की पड़ताल में समय का फेर की झलक साफ दिखाई दी। इस तालाब से पानी तो गायब मिला ही। वहीं बाउंड्रीवाल के नाम पर बनाई गई बैरीकेटिंग और मुख्य दरवाजा जमीदाेंज नजर आया। मौके पर मिले मंडी आढ़तों और मजदूरों की मानें तो बरसाती पानी ही अब तक इस तालाब को आदर्श बनाए हुए है।
प्रशासन चुप बैठा, यहां भी पानी रूठा
औरैया। ग्राम बरमुपुर की तरह बसपा सरकार में ग्राम पंचायत सुरान में भी गांव के पुराने तालाब के निकट मॉडल तालाब का निर्माण कराया गया था। अनदेखी ने पुराने ताल का अस्तित्व तो लगभग समाप्त ही कर दिया है। पड़ताल के दौरान मॉडल तालाब दम तोड़ता नजर आया। टूटा गेट, टूटी तारों की बाड़, वृक्षों के से वीरान नजर आ रहे हैं।
जल संकट से निपटने के लिए सूखे तालाबों को भरवाए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। तहसीलों में राजस्व विभाग के लेखपाल व कानून गो तथा ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत कर्मियों को सभी सूखे तालाबों सूचीबद्ध किए जाने को निर्देशित किया गया है।
एके सिंह, एडीएम