गंदगी से पटा पड़ा सूखे माइनर की हालत।
- फोटो : अमर उजाला
निचली गंगा नहर में पानी न होने से क्षेत्र के माइनर और बंबे सूखे पड़े हैं। बढ़े हुए तापमान के कारण गेहूं की फसल को इस समय सिंचाई की जरूरत है। मगर पानी न होने से किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र की हजारों एकड़ फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
पिछले दो सप्ताह से इटावा निचली गंगा नहर में पानी का बहाव नहीं है। जिसके कारण बंबे व माइनर सूखे पड़े है। क्षेत्र के गांव मधवापुर, नौंगवां, अमरपुर, कंचौसी, सूखमपुर, अघार, हरतौली ढिकियापुर, घसाकापुर्वा में हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई ढिकियापुर मंगलपुर, कनमऊ, सूखमपुर व परजनी माइनर के पानी पर ही निर्भर है। मगर ये सभी माइनर सूखे पड़े हैं। इस समय तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल पर संकट है। जिससे किसानों को सिंचाई की चिंता सता रही है।
मगर माइनर सूखे होने से किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण किसानों की फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसानों ने बताया कि पानी न होने से वह लोग निजी ट्यूबवेल का सहारा लेने को मजबूर हैं। जो काफी मंहगी पड़ रही है। कई किसान इतना खर्च करने में सक्षम नहीं हैं। किसान ब्रजेश बाथम, यज्ञदत्त दीक्षित, कुंवर सिंह, श्रीकृष्ण, प्रेमचंद्र, किशोरी लाल आदि किसानों ने डीएम से मांग की है कि नहरों में पानी टेल तक पहुंचाया जाए। जिससे उनकी फसलें बच सकें।