बिजली बिल घोटाले की आग अभी ठंडी नहीं हो पाई कि विभाग एक बार फिर से शहर में लगाए गए टेंपर्ड मीटरों के कारण चर्चा में आ गया है। बीते एक साल से यह कारनामा धड़ल्ले से चल रहा है। इसके बावजूद किसी को खबर तक नहीं है। इसके कारण विभाग को लाखों रुपये प्रतिमाह राजस्व का नुकसान उठाना ही पड़ रहा है। यही वजह है कि अधिकारियों की कोशिशों के बाद भी थ्रू रेट 4.62 रुपये प्रति यूनिट पहुंचना नामुमकिन बना है।
मीटर टेंपरिंग मामले में बिजली विभाग की ओर से शहर में मीटर लगाने के लिए अनुबंधित कंपनियों पर शक की सुई घूमने लगी है। अनुबंधित कंपनियों में सुजुस इंपेक्ट्स, गुडलक और शिकोहाबाद की उत्तम इलेक्ट्रिकल्स हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो शहर में लगभग एक साल से इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने का काम चल रहा है। शायद तभी से टेंपर्ड मीटर लगाए जा रहे हैं। इसमें तीन से पांच हजार रुपये तक उपभोक्ता से वसूल कर विभाग को बट्टा लगाने का काम किया जा रहा है।
फिलहाल अधिकारियों के लिए इस समय जो सबसे बड़ी समस्या है वह है 4.62 रुपये प्रति यूनिट की दर से थ्रू रेट पाना। मामले में नाम न छापने की शर्त पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में उच्चाधिकारियों को तत्काल मीटर लगाने वाली एजेंसियों के खिलाफ जांच करानी चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि हम लोग 4.62 रुपये का थ्रू रेट लाने के लिए सुबह-शाम एक किए हुए हैं। लेकिन टेंपर्ड मीटरों के चलते सफलता मिलती नहीं दिख रही है।
मामले की जानकारी अभी तक संज्ञान में नहीं आई है। अगर इस तरह के टेंपर्ड मीटर लगाए गए हैं तो यह एक बड़ा मामला है। इटावा में भी इस तरह के काम की जानकारी मिली है। इसमें कोई बड़ा गैंग काम कर रहा है। इससे विभाग को काफी नुकसान हो रहा है। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
सत्यवीर राठौर, एमडी, दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड