औरैया। लॉकडाउन के चलते कामकाज ठप होने से जिले के कारोबार को तगड़ा झटका लगा था। अनलॉक में बाजार खुलने से राहत मिली तो इधर पितृपक्ष में बाजार में सन्नाटा छा गया है। दुकानदार दिन भर ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं। हाल यह है कि बिक्री न होने से दुकान के साथ-साथ कर्मचारियों का भी खर्च निकल पाना मुश्किल हो रहा है, जिससे व्यापारी परेशान हैं। मालूम हो कि पितृपक्ष में अधिकांश लोग नई चीज खरीदने और नया काम प्रारंभ करने से परहेज करते हैं। इसके चलते बाजार की गतिविधियां भी ठप-सी हो जाती हैं।
कोरोना के चलते पहले से ही शादी विवाह के कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं। इसके चलते लोग नए कपड़ों को भी नहीं सिलवा रहे हैं। जिससे बटन, चेन, धागा आदि का बाजार पूरी तरह से बंद पड़ा है। ऐसे में खर्चा भी नहीं निकल पा रहा है।
पिछले सहालग में जून तक अच्छी खासी बिक्री हो गई थी। लेकिन इस बार कोरोना के चलते ग्राहक बाजार ही नहीं आ रहा है। बिजली का बिल, कर्मचारियों की पगार, घर के खर्चे यह सब जुटा पाना बहुत ही मुश्किल हो गया है।
पहले कोरोना की मार उसके बाद बाजार में आर्थिक संकट और अब पितृ पक्ष। पूरे दिन खाली बैठकर बस ग्राहक का इंतजार करते रहते हैं। शाम को यह सोचकर दुकान बढ़ाकर घर चले जाते हैं कि शायद अगले दिन ग्राहक आएगा। बाजार की हालत ऐसी कभी नहीं रही। जैसी अब है।
सहालग पर कोरोना की मार पड़ गई। इससे ग्राहक पूरे सीजन भर नहीं आए। पितृ पक्ष में लोग नई चीज खरीदते नहीं है। तो यह व्यापारी पर दूसरी मार पड़ गई। कुल मिलाकर पूरा साल ही इसी हालत में गुजरने के आसार नजर आ रहे हैं। इससे बहुत ही चिंता बनी रहती है।