औरैया। ‘कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं होगा, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों’ कवि दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां राज्य अध्यापक पुरस्कार की सूची में शामिल सुनीता कटियार पर सटीक बैठती है। कुछ करने का जज्बा और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें अलग पहचान मिली।
वह जिस भी विद्यालय में तैनात रहीं, वहां की काया ही बदल कर रख दी। इस समय सहार ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुरवा फकीरे में तैनात हैं। वीरान पड़े इस विद्यालय को उन्होंने आदर्श विद्यालय की श्रेणी में पहुंचा दिया। उनके अथक प्रयास का नतीजा है कि विद्यालय के आसपास हराभरा वातावरण है, विद्यालय के बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं। सामान्य ज्ञान में इस विद्यालय के बच्चों का कोई जवाब नहीं है। सुनीता ने बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट में भी प्रशिक्षित किया है। बच्चों की बनाई गई आर्ट पूरे स्कूल में सुसज्जित है। परिषदीय स्कूल की इस काया पलट की हर ओर चर्चा है।
सुनीता कटियार मूल रूप से कानपुर की रहने वाली हैं और यहां दिबियापुर में उनकी ससुराल है। कानपुर से एमए व बीएड करने के बाद दस साल चंडीगढ़ में प्राइवेट शिक्षक के रूप में काम किया। इसके बाद बेसिक शिक्षा में सहायक अध्यापक के रूप में वर्ष 2006 में पहली नियुक्ति औरैया के एरवाकटरा ब्लाक में हुई। नौ महीने बाद भाग्यनगर ब्लाक के प्राइमरी स्कूल में तबादला हो गया। यहां पर बच्चों के साथ मेहनत की और छात्र संख्या डेढ़ गुना से भी ज्यादा कर दी। उनके समय एनपीआरसी खानपुर रहे डॉ. ओमकांत राजपूत बताते हैं कि सुनीता ने विद्यालय की काया ही बदल दी थी। पशु पक्षियों से लगाव के चलते उन्होंने बुलबुल व गिलहरी पाल रखी थी। इसके उनका तबादला पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुरवा फकीरे में हो गया। पर्यावरण से लगाव अनुशासन और कर्तव्य को अपनी जिंदगी का मूल सार मानते हुए सुनीता ने पेड़ पौधों से पहले विद्यालय को सुसज्जित किया। सुनीता की नियुक्ति के समय स्कूल में 57 बच्चे थे। छुट्टी के बाद बच्चों को एक्सट्रा क्लास पढ़ाना शुरू कर दिया।
इसमें उन्होंने किसी भी स्कूल के बच्चे को पढ़ने की छूट दी। धीरे धीरे मांटेसरी व प्राइवेट स्कूल के बच्चे उनका ही स्कूल पसंद करने लगे। इस समय विद्यालय की छात्र संख्या बढ़कर 103 पर पहुंच गई है।
सुनीता कटियार के सौम्य और सरल व्यवहार की सभी तारीफ करते हैं। डीएम अभिषेक सिंह की पत्नी ने कई बार सुनीता कटियार के स्कूल पहुंच कर कार्यों की प्रशंसा की। इससे पहले राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त कर चुके जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक मनीष कुमार ने बताया कि उन्हें खुशी है कि सुनीता कटियार उनके जिला विज्ञान क्लब से जुड़ी हैं। ग्राम प्रधान सत्यदीन दोहरे ने बताया कि सुनीता ने उनके गांव के बच्चों में जो बदलाव किया है वह बहुत अचंभित करने वाला है। कक्षा 8 के छात्र गीतेंद्र, ऋषभ, नैतिक व रौनक, कक्षा सात की डॉली, शिखा व अंकित ने बताया कि वह स्कूल आकर अपनापन महसूस करते हैं। लॉकडाउन में विद्यालय बंद रहने पर भी मैडम उनसे फोन पर बात करती थी।
सुनीता ने छात्र पुरातन परिषद व मीना मंच के कार्यक्रमों के बीच भी तालमेल बनाकर रखा है। दो साल पहले एबीआरसी पद पर चयन होने के बावजूद बच्चों के मना करने पर सुनीता ने एबीआरसी पद को छोड़ दिया। जिला विज्ञान क्लब की ओर से कराए गए कई सेमिनारों और कार्यक्रमों में सुनीता के पढ़ाए बच्चे बढ़ चढ़ कर शामिल हुए और प्रथम पुरस्कार से लेकर विज्ञान कम्पटीशन में शील्ड तक जीती। मंडल स्तर तक बच्चों ने खेलकूद में प्रतिभा दिखाई। सुनीता के इस कार्य को उनके द्वारा सुनीता कटियार नाम से कुछ दिन पहले बनाए गए यू ट्यूब चैनल पर भी देखा जा सकता है।