चुनाव यानि वोटरों के नखरे, कुछ ऐसे ही ठाट इन दिनों अजीतमल ब्लाक की नवसृजित ग्राम पंचायत सतहड़ी के मतदाताओं के हैं। शनिवार पांच दिसंबर को तीसरे चरण में मतदान करने को तैयार सतहड़ी के मतदाता पहली बार अपने गांव की सरकार बनाने को मतदान करने जा रहे हैं। वोटरों का उत्साह तो चरम पर है ही।
वहीं अब तक उपेक्षित रहे गांव के विकास के लिए मेनका की बूढ़ी आंखों में सपने संजो रखे हैं। इन ग्राम सभाओं में पहली बार बनने जा रही गांव की सरकार गठन को लेकर दावेदारों से ज्यादा वोटरों की जल्दबाजी देखते ही बन रही है। गुरुवार को नवसृजित ग्राम सभा सतहड़ी का अमर उजाला ने चुनावी हाल लिया। पेश है नई ग्राम सभा की चुनावी रिपोर्ट....
ऐसा गांव है मेरा... फफूंद रोड पर आठ किमी. दूर बसी अजीतमल ब्लाक की नवसृजित ग्राम पंचायत सतहड़ी अब तक एक मजरे की पहचान रखती रही है। साल 2015 के परिसीमन में सतहड़ी को ग्राम पंचायत ब्योरा नवल सिंह से काटकर नई ग्राम पंचायत का दर्जा दिया गया है।
ग्राम सतहड़ी में 65 फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग, 35 फीसदी अनुसूचित जाति एवं दो फीसदी सामान्य वर्ग के वोटर हैं। ग्राम पंचायत चुनाव में ग्राम सभा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है।
ग्राम की दुश्वारियां- एक साधारण से मजरे (छोटा गांव) की छवि रखने वाली नवसृजित ग्राम पंचायत सतहड़ी की गलियां कच्ची व अधबने खरंजे की हालत में हैं। गांव में बनी पानी की टंकी से पानी की बंद आपूर्ति, जलभराव से उपजी गंदगी से बजबजाती नालियां, उस पर से सफाई कर्मी गैरहाजिरी से ग्राम सभा खुद में नारकीय सरीखी दिखाई दे रही है।
अब मिली है आजादी - औरैया। देश स्वतंत्र होने के बाद 68 सालों बाद नवसृजित ग्राम पंचायत सतहड़ी के मतदाता वोट डालने को लेकर खासे रोमांचित हैं। ग्राम सभा के सृजन के सवाल पर एक सुर में बोले वोटर सच्चे मायनों में अब आजादी मिली है। वर्ष 2015 में इस गांव का ग्राम सभा का रुतबा मिलने से गांव के लोग फूले नहीं समा रहे हैं।
युवा मतदान से वंचित- मुरादगंज। नवसृजित ग्राम पंचायत सतहडी में जहां अपने गांव की सरकार चुनने को वोटर उतावले हैं। वहीं गांव की पड़ताल में कुमारी रजनी, कुमारी शिखा, अंजली, संध्या देवी, शिवा, धर्मेंद्र, दीपचंद्र, गौरव कुमार, शीशू, शिवम कुमार आदि युवा मतदाता पात्र होते हुए वोटर न बनाए जाने से दु:खी हैं।