आलू किसानों पर इस बार फिर संकट है। मौसम की मार से आलू का साइज नहीं बढ़ रहा है। इससे उत्पादन पर खासा असर है। साथ ही मंदी ने इन्हें बेचैन कर रखा है। इन्हें लागत निकलती भी नहीं लग रही है। ऐसे में त्योहार को देखते हुए इनके चेहरे का रंग उड़ने लगा है।
जिले में इस साल 5110 हेक्टेयर में आलू की फसल की बुवाई की गई है। एक लाख 27 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य है। मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित होने के आसार बन गए हैं। इसकी वजह भी है। मौसम में उतार चढ़ाव से आलू का साइज छोटा हो गया है। हाल यह है कि अगैती फसल करने वालों को भी वाजिब मूल्य नहीं मिल पाया।
पहले नोटबंदी ने आलू किसानों के सामने समस्या खड़ी की, अब मंदी कमर तोड़ रही है। प्रति हेक्टेयर (12.5 बीघा) में 500 से 700 पैकेट तक आलू होता है। एक पैकेट में 50 किलो वजन होता है।