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Auraiya News: 25 साल की उम्र में किस्मत ने लूटा, 20 साल बाद लौटा तो अपने बेगाने

Wed, 11 Feb 2026 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो-2-अस्पताल परिसर में मौजूद महाराष्ट्र से आई टीम के साथ दौलत(पीली शर्ट में)। संवाद - फोटो : 1
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अजीतमल। एक इंसान की हंसती-खेलती जिंदगी एक पल में कैसे इतनी नासूर बन जाती है कि सिर से मां-बाप का साया उठ जाए और सालों बाद घर लौटे तो इकलौती बहन भी उसे पहचानने से इन्कार कर दे।
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ये कहानी है युवक दौलत सिंह की...। जब वह 25 साल का था तो किस्मत ने उसके मां-बाप को छीन लिया। इसके बाद अपनों की अनदेखी ने उसका मानसिक संतुलन ऐसा बिगाड़ा कि वह 20 सालों तक हिंदुस्तान से नेपाल तक भटकता रहा। एक संस्था की मदद से वह नौ फरवरी को घर लौटे दौलत की दुनिया एक बार फिर से उस वक्त उजड़ गई, जब उसकी बहन ने उसे पहचानने से ही इन्कार कर दिया। जबकि गांव वाले उसे पहचान गए और उसका सहारा बने।

दौलत सिंह की कहानी की जड़ें पांच दशक पहले तक जाती हैं। सूर्य नगर निवासी रामबेटी (दौलत की मां) का शादी के कुछ ही सालों बाद सुहाग उजड़ गया। विधवा हुईं रामबेटी अपनी मासूम बेटी गुड्डी को लेकर मायके आ गईं।
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भविष्य की चिंता को लेकर रामबेटी ने जनपद इटावा के कुशगवां गांव निवासी रामसेवक यादव को अपना जीवन साथी बनाया। इसके बाद रामबेटी और रामसेवक अजीतमल के राजीव नगर में ही रहने लगे, वहां दौलत सिंह का जन्म हुआ।

समय बीतता गया, दौलत 25 साल का हो गया। गुड्डी की शादी हो गई और वह भी अपने पति के साथ मां के घर पर ही रहने लगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कुछ ही समय के अंतराल में मां-बाप दोनों का निधन हो गया। इसके बाद गुड्डी ही दौलत की देखभाल करती थी, लेकिन कुछ समय बाद दौलत की जिंदगी उसके अपनों के लिए बोझ बन गई।

इसी दौरान संदिग्ध हालात में उसे गंभीर चोट लग गई। आर्थिक तंगी और समुचित इलाज न मिलने के कारण उसकी हालत और खराब होती गई। इससे उसका मानसिक संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ता चला गया। वह अक्सर रोते हुए भूखा ही सो जाता था। तानों और अपनों की बेरुखी ने उसे तनाव के हवाले कर दिया था।

फिर एक दिन आंसू बहाता दौलत अपने पिता के गांव कुशगवां बकेवर चला गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वहां से लापता हो गया। बहन ने भी 25 साल के जवान भाई को ढूंढने की कोशिश नहीं की। पुलिस को गायब होने की सूचना देकर इतिश्री कर ली।

किसी ने कहा वह पागल हो गया, और सालों बाद उसके जिंदा रहने की उम्मीद भी छोड़ दी। इधर, नौ फरवरी को जब दौलत अपनी बहन के प्यार और अपनेपन का खजाना पाने की आस में 20 साल बाद अपने घर पहुंचा तो बहन ने उसे पहचानने से भी इन्कार कर दिया। हालांकि गांववाले उसे तुरंत पहचान गए।

दौलत (अब 45 साल की उम्र) का कहना है कि अब उसका कोई नहीं है। पता नहीं भगवान ने उसे जिंदा क्यों रखा। फिलहाल अभी गांववाले ही दौलत को ध्यान रख रहे हैं। उसे खाना-पीना दे रहे।


नेपाल और महाराष्ट्र में उपचार से ठीक हुआ
बताया गया है कि 27 दिसंबर 2020 को दौलत सिंह किसी तरह नेपाल के जनकपुर स्थित मानव सेवा आश्रम पहुंचा। आश्रम के लोगों ने उसे संरक्षण देकर इलाज शुरू कराया। लगातार देखभाल से उसकी स्थिति में सुधार हुआ तो उसने अपना नाम और पता बताया। इसके बाद मानव सेवा आश्रम ने महाराष्ट्र स्थित श्रद्धा रिहैबलिटेशन फाउंडेशन से संपर्क किया।
20 जनवरी 2026 को फाउंडेशन के सदस्य दौलत को लेकर महाराष्ट्र पहुंचे, जहां डॉ. भरत बटवानी की देखरेख में उसका उपचार शुरू हुआ। स्वास्थ्य में सुधार के बाद फाउंडेशन की टीम दौलत सिंह को उसके गांव इटावा के कुशगवां व थाना बकेवर लेकर पहुंची। टीम के जानकारी देने पर थाना पुलिस ने दौलत को संरक्षण देने से हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद टीम दौलत को लेकर कोतवाली अजीतमल पहुंची।

पुनर्वास और अधिकारों को लेकर करेंगे कार्रवाई
प्रभारी निरीक्षक ललितेश त्रिपाठी ने बताया कि युवक को उसके पैतृक गांव भेजने, जमीन-जायदाद की स्थिति की जांच कराने और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उसके पुनर्वास और अधिकारों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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