औरैया। लॉकडाउन के चलते कामकाज ठप होने से दूसरे प्रांतों में काम करने वाले मजदूरों का घर लौटने का सिलसिला थम नहीं रहा है। रविवार को हाईवे पर झुंड के रूप में मजदूर जाते दिए। रोजगार न मिलने एक-एक पैसे के लिए तरस रहे मजदूरों की कोशिश है कि वह किसी तरह अपने घर पहुंच जाए। घर पहुंचने की धुन में जिसको जो साधन मिला, उसी से निकल पड़ा। साधन न मिलने पर कुछ लोग तो पैदल ही चल दिए। गुजरात से आ रहे प्रमोद बताते हैं कि पैदल सफर शुरू किया। रास्ते में कई वाहनों से लिफ्ट भी लिया। उनका दावा है कि अब तक कम से कम तीन सौ किमी पैदल भी सफर कर चुके हैं।
वहीं, परिजनों को भी चिंता बनी हुई है। बार-बार फोन करके सिर्फ यही पूछ रहे हैं कि घर कब आओगे। हाईवे पर पैदल निकल रहे कुछ मजदूरों का कहना है कि घरों को जाने के लिए संसाधनों का अभाव होने से वह पैदल ही निकल पड़े हैं। इस दौरान उन्हें ट्रक चालकों ने भी सहारा दिया तो चेकिंग पर लगी पुलिस ने उन्हें वापस भी लौटाया। घर पहुंचने की आस में किसी तरह से गांवों के अंदर से घुसकर छिपते हुए फिर हाईवे पर पहुंचे और अभी भी कदम नहीं थम रहे हैं।
बिहार के कटिहार जिला निवासी महमुद्दीन खां दिल्ली में मजदूरी करते हैं। कहते हैं सोचा भी नहीं था कि ऐसे दिन देखने को मिलेंगे। लॉकडाउन के चलते 45 दिनों से रोजी-रोटी के सभी संसाधन ठप हो जाने से पाई-पाई को परेशान हो गए। दिल्ली के बार्डर सीज होने के कारण वहां से निकल पाना भी आसान नहीं था। फिर भी किसी तरह से अपना सामान समेटकर छिपते-छिपाते पैदल ही अपने घर की ओर निकल पड़े हैं। शुक्रवार को दिल्ली से निकलने के बाद रविवार को औरैया पहुंचे हैं। इस बीच लगभग दो सौ किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा।
दिल्ली में रिक्शा चलाकर अपना व परिवार का भरण पोषण करने वाले बिहार निवासी मोहम्मद सगीर बताते हैं कि सब कुछ बंद हो जाने से डेढ़ माह से कमाए हुए रुपयों से गुजारा कर रहे थे। एक सप्ताह पहले रुपये खत्म हो गए। ऐसे में घर से रुपये मंगाने पड़े। लेकिन घर में भी कोई कमाने वाला न होने से वहां भी आर्थिक संकट खड़ा है। ऐसे में घर जाने के लिए पैदल ही रास्ता पकड़ लिया। बीच-बीच में खाने खिलाने वालों से बहुत मदद मिली।
गुजरात में पेंट्स कंपनी में काम करने वाले प्रमोद बताते हैं कि सभी फैक्ट्रियां बंद हो गईं। ऐसे में अब उनके सामने घर लौटना ही विकल्प बचा। इस दौरान कई जगहों पर ट्रक चालकों ने मदद की और थोड़ी-थोड़ी दूर तक बिठाकर ले गए। लेकिन जहां चेकिंग होते मिली तो उतार दिया। गनीमत यह रही कि रास्ते में किसी ने भी कोई किराया नहीं लिया। चार दिन से चल रहे हैं। लगभग तीन सौ किमी चल चुके हैं।