औरैया। बदलते दौर के साथ ही लोग फास्टफूड का सेवन ज्यादा करने लगे हैं। इससे लिवर का स्वास्थ्य बिगड़ता है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना लिवर रोगी बहुतायत में पहुंच रहे हैं लेकिन यहां उपचार के पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
लोगों को कानपुर तक दौड़ना पड़ रहा। महज एलएफटी व केएफटी जांच के बाद फिजिशियन शुरुआती उपचार कर पा रहे हैं। अहम जांचों की सुविधा ही नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना 100 से ज्यादा लिवर रोगी पहुंच रहे हैं। इनमें फैटी लिवर से लेकर तमाम तरह की विकृतियों की समस्या सामने आ रही है। ओपीडी के फिजिशियन कक्ष के बाहर ऐसे मरीजों की भीड़ उमड़ रही है लेकिन जरूरी उपचार के अभाव है।
मेडिकल कॉलेज में एमआरआई व एंडोस्कोपी जांच की सुविधा भी नहीं है। ऐसे में ओपीडी में मौजूद फिजिशियन महज खून की एलएफटी व केएफटी जांच कराते हुए मरीजों का सामान्य उपचार कर पा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार गैस्ट्रो का विभाग ही नहीं है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। फिजिशियन डॉक्टरों के जरिए लिवर रोगियों को प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जा रही है। मामला गंभीर होने पर मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
लिवर रोगियों को मेडिकल कॉलेज में होने प्राथमिक उपचार में आराम न मिलने पर कानपुर व सैफई की दौड़ लगानी पड़ रही है। जहां जरूरी जांचों के बाद उन्हें उपचार मिल पा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रो का विभाग नहीं है। ऐसे में अभी तक विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। जहां तक जांच की बात है। इसके लिए शासन को पत्राचार किया जाता है।-डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज