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बीहड़ के गांवों में बुंदेलखंड जैसे हालात

Fri, 15 Apr 2016 11:35 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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जैतपुर गांव में खेतों में दम तोड़ती गेहूं की फसल - फोटो : amar ujala beuro
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 यमुना पट्टी के बीहड़ी गांवों में रबी सीजन की फसलें बिना सिंचाई के तबाह होकर रह गई हैं। यहां किसान बुंदेलखंड जैसे हालातों से जूझ रहे हैं। बोआई के बाद समय से पानी न मिल पाने के कारण गेहूं उत्पादन न के बराबर है। बीते सालों में 12 क्विंटल प्रति बीघा गेहूं उत्पादन करने वाले खेत इस बार दो से तीन क्विंटल प्रति बीघा पर सिमट गए हैं। क्राप कटिंग से फसल उत्पादन आंकने वाले अफसर अब तक बीहड़ी गांवों तक नहीं पहुंचे हैं।
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औरैया और अजीतमल ब्लाक क्षेत्र के यमुना पट्टी पर बसे गांव अयाना, तिवरलालपुर, भूरेपुर खुर्द, धनऊपुर, केशीपुर, कुवरदेपुर, भौतापुर, जसवंतपुर, रोशंगपुर, भरतौल, बीझलपुर, सड़रापुर, मिश्रपुर मानिकचंद, कटघरा ब्रह्मनान, कटघरा जुन्नारदार, सिहौली, भासौन, रहटौली, कैथौली, नगला बनारस, फरिहा, बबाइन व नवादा महीपत शाह के अलावा दासपुर, मानपुर, जमालीपुर, अस्ता, खरका, जैतपुर, गोहना, कलापुर, अस्ता आदि करीब 135 गांवों के किसानों को पानी की कमी ने तबाह करके रख दिया है।

नहरों की पहुंच से दूर बीहड़ी गांवों के सूखे बंबे व रजबहों में पूरे समय उड़ती रही। इसके चलते लगातार तीसरी साल 20 फीट तक गिरे भूगर्भ जल स्तर से इन गांवों के किसानों को फसलों की सिंचाई तक के लिए पानी नहीं मिल सका। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान बुआई के बाद से बिन सिंचाई गेहूं फसल खेतों पर मुरझाई दिखी। जल संकट और सूखे की मार के चलते बीहड़ गांवों के खेतों में बेगारी हुई गेहूं फसल की कटाई, मड़ाई और तैयार फसल को खलिहान से घर तक पहुंचाना भी किसान के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
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उत्पादन गिरा, दाना मरा
पानी के अकाल ने बीहड़ गांवों के गेहूं किसानों को दोहरी मार दी है। सामान्यत: गेहूं फसल के लिए आवश्यक तीन सिंचाई के स्थान पर एक भी सिंचाई न मिलने से बीहड़ के गांवों में भगवान भरोसे हुई गेहूं की फसल का उत्पादन 12 क्विंटल से गिर कर एक बीघा में ढाई से तीन क्विंटल तक तो सिमटा ही है। प्रतिकूल मौसम के चलते  गेहूं का मरा दाना उनके जले पर नमक छिड़कता साबित हो रहा है।

चना फसल पर भारी पड़ी बीज की लागत
रबी सीजन में बीहड़ गांवों से मौसम के साथ मुंह मोड़ गए पानी ने गेहूं के साथ चना की फसल को लीला है। जरूरत के समय सिंचाई के लिए पानी को तरसी फसल बुरी तरह तबाह हुई है। बीहड़ गांव दासपुर, मानपुर, जमालीपुर, अस्ता, खरका, जैतपुर, गोहना, कलापुर, अस्ता के खेतों के हालात और उजड़े किसानों की मानें तो चना फसल से बीज की बुआई तक का खर्च नहीं निकला है।

क्राप कटिंग में नहीं शामिल बीहड़ के गांव
सूखे की मार से तबाह हुई गेहूं फसल के गिरे उत्पादन पर शासकीय आदेशों के तहत क्राप कटिंग कराई जा रही है। यह विडंबना ही है कि क्राप कटिंग के लिए सूचीबद्ध किए गए गांवों में यमुना पट्टी और बीहड़ गांवों के नाम शामिल नहीं हैं। डीएम साहिबा, पानी संकट और सूखे के कहर से जूझ रहे इन गांवों में भी क्राप कटिंग तो बनती है।
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