औरैया। जिले की सड़कों पर बिना फिटनेस के फर्राटा भर रहे वाहन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। विभाग अभी तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाया है। सड़क हादसे होने या फिर चेकिंग में पकड़े जाने पर जब वाहनों की हकीकत पता चलती है तो विभाग भी कागजी कार्रवाई कर खानापूरी करने में जुट जाते हैं।
परिवहन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो एआरटीओ कार्यालय में करीब दो लाख वाहनों का पंजीकरण है। जिसमें नौ हजार के करीब व्यवसायिक वाहन पंजीकृत हैं। इसमें से 1723 वाहन बिना फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहन संचालकों को कई बार विभाग नोटिस जारी कर करने की बात कह रहा है। मगर विभाग द्वारा चलाए गए अभियान और जारी की गई नोटिस के बाद भी यह संख्या जस की तस बनी हुई है।
इनमें कई तरह के वाहन ऐसे हैं जो लोगों की जान खतरे में डाल कर सवारियां ढोने में लगे हैं। शहर में बच्चों को ई-रिक्शे आटो चलाना मना है बावजूद इसके संचालन किया जा रहा है। बिना हेड लाइट के ई-रिक्शा को दौड़ाए जा रहे हैं। दिन में तो दिक्कत नहीं होती लेकिन रात में स्थिति गंभीर हो जाती है। बच्चे जो पढ़ाई की उम्र में रिक्शा चला रहे हैं, अक्सर ही दुर्घटना का कारण बन रहे हैं।
शहर में बंद नहीं हो रही डग्गामारी
जगह-जगह चेकिंग होने के बाद भी शहर में डग्गामारी जारी है। चौराहों पर सवारियों को वाहनों में ठूंस दिया जाता है और चौराहे से गुजरने के बाद फिर से सवारियां लटका दी जाती हैं। आलम यह है कि पायदान कटवाने के बाद भी टेंपो के पीछे सवारियां लटकती हैं। रोडवेज बसों में भी फॉग लाइट की दरकार है।