औरैया। साइबर ठगों ने इस बार एक विधिक स्वयंसेवक को अपना शिकार बनाया है। ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर बेटे को जेल भेजने की बात कहकर उनसे एक लाख रुपये की ठगी की। इस दौरान पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट भी रखा गया। कैफे संचालक को शक होने पर उसने बेटे को कॉल कराई तब जाकर ठगी का एहसास हुआ। कैफे संचालक की सूझबूझ बड़ी ठगी होने से बच गई।
सदर कोतवाली के बम्हौरी गांव निवासी रमनलाल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में विधिक स्वयंसेवक हैं। वह लोगों को कानूनी सलाह देते हैं। बृहस्पतिवार सुबह उन्हें एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके बेटे शुभम को गिरफ्तार किया गया है और मामले को रफा-दफा करने के लिए एक लाख रुपये मांगे। बेटे का नाम सुनते ही रमनलाल घबरा गए और उन्होंने एक लाख रुपये उधार लिए।
रमनलाल कानपुर सड़क स्थित एक जनसेवा केंद्र पहुंचे और ठग द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड से एक लाख रुपये छह किस्तों में ट्रांसफर किए। ठग ने इसके बाद 10 हजार रुपये और मांगे लेकिन जनसेवा केंद्र संचालक कैफ को संदेह हुआ। कैफ ने आगे रुपये भेजने से मना कर दिया। रमनलाल ने अपने बेटे को फोन किया, जिसने बताया कि वह ठीक है, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि घटना की लिखित शिकायत मिली है और बैंक अधिकारियों से संपर्क कर रुपये होल्ड कराने का प्रयास किया जा रहा है।