औरैया। लखनऊ जिला अदालत के बाहर हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर चलाया। इसका असर सोमवार को शहर में भी देखने को मिला।
कार्रवाई के विरोध में स्थानीय अधिवक्ता पूरी तरह लामबंद हो गए। सुबह से ही शहर स्थित कचहरी में वकील एकजुट होने लगे और उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया।
वकीलों ने सोमवार को पूरी तरह से न्यायिक कार्य से विरत रहने का ऐलान कर दिया। मीडिया प्रभारी शिवम शर्मा ने बताया कि लखनऊ में बिना किसी उचित वैकल्पिक व्यवस्था के 240 अधिवक्ताओं के चैंबरों को बुलडोजर से ढहा दिया गया, इसी आक्रोश के चलते अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर कचहरी परिसर के बाहर प्रदर्शन किया और कामकाज बंद रखा।
अचानक हड़ताल और कार्य बहिष्कार का सीधा असर आम जनता पर पड़ा। अपनी तारीखों और मुकदमों के सिलसिले में दूर-दराज के गांवों और क्षेत्रों से आए सैकड़ों वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
अदालत में किसी भी मामले की सुनवाई न होने के कारण उन्हें बिना किसी राहत के वापस होना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता इंद्रपाल सिंह भदौरिया, अजय पाल सिंह, अभिषेक शुक्ला, कुलदीप दुबे, अतेंद्र पांडेय, सुनील दुबे, संजीव चतुर्वेदी, धीरेंद्र शुक्ला, अनुराग त्रिपाठी, मंजुल मिश्रा, विकास त्रिपाठी, अनूप श्रीवास्तव आदि रहे।
ध्वस्तीकरण का बार एसोसिएशन ने किया विरोध
अजीतमल। बार एसोसिएशन तहसील अजीतमल की बैठक अध्यक्ष शेष नारायण सक्सेना एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई। बैठक में लखनऊ में अधिवक्ताओं के चैंबर ध्वस्त किए जाने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। अधिवक्ताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और घटना की कड़ी भर्त्सना की।
इस संबंध में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने निर्णय लिया कि मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। वहीं अधिवक्ताओं ने सोमवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार भी किया। बैठक में महामंत्री पंकज कुमार चतुर्वेदी समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। (संवाद)