औरैया। बीहड़ में 90 का दशक दस्युओं का बोलबाला था। गांवों के मुखिया से लेकर लोकसभा तक के चुनाव में किसकाे वोट देना है। इसका फरमान बीहड़ से जारी होता था।
अपने गिरोह को बड़ा करने के लिए डकैत मासूमों का अपहरण कर अपराध की दुनिया में ले जाते थे। सीमा परिहार को दस्यु बनाने में भी कुसुमा नाइन की भूमिका रही थी।
गैंग के लिए भोजन व हथियार की व्यवस्था के लिए डकैत अपहरण व राहजनी की घटनाओं को अंजाम देते थे। इसके बाद परिजन को चिट्ठी भेजकर फिरौती की मांग रखते थे। फिरौती न मिलने पर अपह्रत की हत्या कर देते थे या फिर उनको अपनी गैंग का सदस्य बना लेते थे। अयाना थाना क्षेत्र के बबाइन निवासी सीमा परिहार के पिता पशुपालन व दुकान का संचालन कर परिवार का भरण पोषण करते थे।
वर्ष 1983 में जब सीमा परिहार 13 वर्ष की थीं तब कुसुमा नाइन व लालाराम ने गैंग के साथ रात के समय धावा बोलकर उनका अपहरण कर लिया। करीब दो साल तक सीमा को अपने साथ लेकर घूमते रहे। डकैतों के साथ लंबा समय बिता देने पर सीमा ने भी हथियार उठा लिए।