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Auraiya News: कुंदीलाल गुप्ता ने तोड़े थे लोहे के ताले, हिला दी थी अंग्रेजी हुकूमत

Sun, 09 Aug 2026 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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शहीद पार्क में स्थित क्रांतिकारी मुकुंदीलाल गुप्ता की प्रतिमा। संवाद - फोटो : सांकेतिक
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औरैया। अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाला वीरता का प्रतीक काकोरी कांड इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इस कांड में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों में औरैया के मुकुंदीलाल गुप्ता भी शामिल थे। उन्होंने अपने बलशाली शरीर के कारण ट्रेन लूट में अहम जिम्मेदारी निभाई थी।
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मुकुंदीलाल ने लूटे गए बक्से का ताला अपने हाथों से तोड़ा था। तब चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें ''भारत वीर'' की उपाधि से नवाजा था। मुकुंदीलाल गुप्ता का जन्म जनवरी 1901 में शहर के एक साधारण वैश्य परिवार में हुआ था। उनके तेवर शुरू से ही विद्रोही थे और उन्हें भारत मां की गुलामी का दर्द सताता था। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गेंदा लाल दीक्षित के संपर्क में आने के बाद वह मातृ वेदी संस्था में शामिल हुए थे।
सबसे पहले उन्होंने 1918 के षड्यंत्र केस में हिस्सा लिया था। इसमें उन पर मुकदमा चला और छह वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। जेल से छूटने के बाद वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़कर कार्य करने लगे थे।
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इसके बाद उनका संपर्क रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद से हुआ था। स्वाधीनता आंदोलन में बार-बार भाग लेने और जेल जाने से उनका परिवार पुलिस के निशाने पर आ गया था। मुकुंदीलाल अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों में लगातार लिप्त रहे। जब काकोरी कांड की योजना बनाई गई, तो 9 अगस्त 1925 को उन्होंने अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ अंग्रेजी खजाना लूटा था।
हैलट अस्पताल में ली थी अंतिम सांस
एक मुखबिर की सूचना पर मुकुंदीलाल 26 सितंबर 1926 को पुलिस के हत्थे चढ़े थे। काकोरी का मुकदमा लखनऊ में चला, जिसमें उन्हें काला पानी की सजा सुनाई गई थी। देश आजाद होने के बाद उन्हें रिहा किया गया था। 12 अक्तूबर 1972 को कानपुर के हैलट अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली थी। औरैया के शहीद पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है, जो आज भी उनकी वीरता की कहानी कहती है।
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