बीहड़ पट्टी के पंचनद क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला लगेगा। यमुना, चंबल, क्वारी, सिंधु व पहुज नदी के संगम पर श्रद्धा और आस्था की डुबकी लगाने की तैयारियों के लिए प्रशासन ने इंतजाम शुरू कर दिए हैं। यहां प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं।
कर्णखेरा, मुकुंदवन, प्रमोदवन, कालेश्वर व भारेश्वर मंदिरों के पवित्र स्थलों पर श्रद्धालु भक्तों की आज भीड़ उमड़ेगी। इसमें औरैया, इटावा, जालौन, भिंड, कन्नौज समेत कई प्रांतों से लोग पहुंचते है। मंदिर के महंत अश्वनी कुमार बताते हैं कि शास्त्रों में इस स्थान का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में जो भक्त पंचनद में डुबकी लगाता है। उसकी अकाल मृत्यु टल जाती है। वहीं आचार्य देवेंद्र कुमार दुबे ने बताया कि गोस्वामी तुलसी दास ने यहां पर रामायण का कुछ अंश लिखा था।
आज लगेगी श्रद्धा और आस्था की डुबकी
औरैया। कार्तिक पूर्णिमा पर बुधवार को जिले की पवित्र नदियों सरोवरों, जलाशयों में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। पचनद, शेरगढ़ घाट में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। हिंदू पंचाग के अनुसार साल का आठवां महीना कार्तिक का महीना होता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कहलाती है। पुराणों में इस दिन स्नान, व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। आचार्य रामकुमार शास्त्री कहते है कि कार्तिक पूर्णिमा पर व्रत रहकर स्नान करने से अकाल मृत्यु टल जाती है। ईश्वर उसकी सभी मनोकामना पूरी करतें है। इस दिन दान देने से घर में खुशहाली आती है। बीमारी, क्लेश सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। भक्त देर शाम सरोवरों व घरों में दीप जलाएं। यह दीपक खुशहाली का प्रतीक है।
यह भी करें
- इस दिन सत्य नारायण की कथा सुननी चाहिए।
- स्नान, दान, हवन, यज्ञ व उपासना अवश्य करनी चाहिए।
- शाम के समय घर के अंदर, बाहर दीपक अवश्य जलाना चाहिए।
- इस दिन गरीबों व जरुरतमंदों को दान अवश्य करना चाहिए।