समाजवादी पार्टी ने सियासी समीकरण साधते हुए कमलेश पाठक को विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया है। कमलेश पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के नजदीकी मानें जाते हैं। इनके नाम सबसे कम उम्र का विधायक होने का भी रिकार्ड है। ।
समाजवादी पार्टी की ओर से विधान परिषद उम्मीदवारों की सूची में डा. कमलेश पाठक का नाम शामिल करके एक तरफ पुराने कार्यकर्ताओं को मौका दिया है तो दूसरी तरफ जातीय गणित भी ठीक करने की कोशिश की है। इस इलाके में अभी तक पार्टी के ब्राह्मण जनप्रतिनिधि की कमी रही है। इस कमी को डा. पाठक के जरिए पूरा करके चुनाव से ठीक पहले ब्राह्मण मतदाताओं को रिझाने की भी कोशिश की गई है। डा. पाठक मूल रूप से शहर से सात किलोमीटर दूर भड़ारीपुर गांव के निवासी है।
वर्ष 1985 में मात्र 28 वर्ष की उम्र में पहली बार समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़कर विधायक बने डा. पाठक को सदर विधानसभा क्षेत्र के ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा में सबसे कम उम्र के विधायक बनने का गौरव भी मिला था। वर्ष1990 में विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बने। वर्ष 2002 से डेरापुर से विधायक चुने गए। सपा मुखिया मुलायम सिंह के नजदीकी माने जाने वाले डा. कमलेश पाठक ने जिला बचाओ आंदोलन में अपनी ही पार्टी का विरोध करके बगावत भी की थी। वर्ष 2007 में दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े मगर हार गए। बसपा सरकार में इंजीनियर हत्याकांड का मुद्दा उठाकर बसपा सरकार को घेरने का काम किया।
जेल में रहकर 2009 से अकबरपुर से लोकसभा चुनाव लड़े मगर हार गए। 2012 में सिकंदरा से विधानसभा का चुनाव लड़े और इस बार भी हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2013 में रेशम विभाग के अध्यक्ष (राज्यमंत्री का दर्जा) बनाया गया। समाजवादी पार्टी ने 17 मई 2015 को इनका नाम एमएलसी प्रत्याशियों की सूची में शामिल किया तो इलाके में जश्न मनने लगा। जिला बचाओ आंदोलन में व इंजीनियर हत्याकांड का विरोध करने पर इनके खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज हुए। रासुका की भी कार्रवाई हुई।