राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत माध्यमिक स्कूलों में प्रवेश को लेकर जागरूकता अभियान को खूब चलाया गया। रैलियां भी निकाली गई। इसके बाबजूद शासन से सहायता प्राप्त स्कू लों में शिक्षा सत्र शुरुआत से लेकर अब तक प्रवेश का कोरम अधूरा ही रहा है। अच्छी साख रखने वाले विद्यालय भी इस बार छात्रों के प्रवेश में फिसड्डी साबित हुए हैं। न छात्रों और न ही अभिभावकों को प्रवेश के लिए रिझाने में नाकाम रहे माध्यमिक स्कूलों के नवीन शिक्षा सत्र में प्रवेश की पोल खोलती रिपोर्ट।
शिक्षा के हाईटेक दौर में संसाधनों की कमी से जूझ रहे जिले के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों पर नाम बड़े दर्शन छोटे का मुहावरा फिट बैठता दिखाई दे रहा है। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से होड़ लगाने का दंभ भरने वाले सरकार से सहायता प्राप्त जिले के माध्यमिक स्कूलों की जूनियर कक्षाओं में लगातार छात्रों का ग्राफ गिरता चला जा रहा है। इस बार भी एक अप्रैल से शुरू हुए नवीन शिक्षा सत्र में माध्यमिक स्कूलों का कुछ ऐसा ही हाल है। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत नए शिक्षा सत्र में विद्यालयों की ओर से चलाया जा रहा जागरूकता अभियान अब तक तक असफल साबित हुआ है। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से लेकर अब प्रवेश पर नजर डालें तो जिले के उच्च श्रेणी के विद्यालय अपनी अच्छी साख पर बट्टा लगवाते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं प्रवेश की होड़ में पिछड़े कई विद्यालय तो उच्च कक्षा में बच्चों के प्रवेश के मामले में दहाई का अंक भी नहीं छू सके।
प्रवेश में पिछड़े टाप फाइव स्कूल
विद्यालय का नाम प्रवेश संख्या
पं. आत्माराम इं.कां, क्योंटरा 03
नगर पालिका इं.का. औरैया 04
रघुनंदन सिंह इं.का. राहतपुर 05
नारायण इं.का. बड़ेरा 07
आदर्श इं.का. अछल्दा 08
नोट -- इसी क्रम में तोमर रघुनाथ सिंह इं.का. अरियारी भी है। यहां इस सत्र में कक्षा छह में मात्र 9 बच्चों के प्रवेश हो सके हैं। शहर के तिलक इंटर कालेज में 10 और वैदिक इंटर कालेज दिबियापुर में 11 ही प्रवेश हो पाए। जबकि यहां पर्याप्त स्टाफ की भी मौजूदगी है।
फैक्ट फाइल=========
जिले में सहायता प्राप्त विद्यालय - 60
वर्तमान में छात्रों की कुल संख्या - 34225
नवीन सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्र - 2347
पिछले सत्र में 3347 हुए थे प्रवेश
औरैया। जिले के माध्यमिक विद्यालयों में पिछले सत्र में सहायता प्राप्त विद्यालयों में 3347 बच्चों का कक्षा छह में प्रवेश लिया था। पिछले सत्र के आंकड़े से जिले के विद्यालय 1000 के बड़े अंतर से पिछड़े हैं।
यह सही है कि माध्यमिक विद्यालयों में जूनियर कक्षाओं के बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। इसका मूल कारण विद्यालयों में सृजित पदों के सापेक्ष टीचरों की संख्या का कम होना है। रहा सवाल माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों की कुल संख्या के कम होने का तो बोर्ड परीक्षा के इंतजार में ज्यादातर छात्रों में अगले कक्षा के लिए प्रवेश नहीं कराया है। अंतिम प्रवेश तक छात्रों की संख्या और बढ़ेगी।
चंद्र प्रताप सिंह
डीआईओएस